शौचालय घोटाले की परतें खुलीं: एंटी करप्शन टीम पहुंची डीपीआरओ दफ्तर, फाइलें खंगालीं
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संवाद 24 संवाददाता।कायमगंज क्षेत्र की ग्राम पंचायत इकलहरा में हुए शौचालय घोटाले की जांच तेज हो गई है। मंगलवार को एंटी करप्शन टीम ने विकास भवन स्थित जिला पंचायती राज अधिकारी (डीपीआरओ) कार्यालय पहुंचकर डीपीआरओ से विस्तृत पूछताछ की। इस दौरान टीम ने शौचालय निर्माण से जुड़ी पत्रावलियों और भुगतान प्रक्रिया से संबंधित अभिलेखों का भी परीक्षण किया।
प्रकरण स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत वर्ष 2016-17 का है। जांच के अनुसार, उस अवधि में ग्राम पंचायत इकलहरा में 512 व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण के लिए प्रति इकाई 12 हजार रुपये की दर से धनराशि स्वीकृत की गई थी। उस समय डीपीआरओ कार्यालय से सीधे ग्राम पंचायत के खाते में राशि हस्तांतरित की जाती थी और जियो टैगिंग की अनिवार्यता भी लागू नहीं थी, जिसका लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं।
शिकायत मिलने के बाद शासन स्तर से मामले की जांच एंटी करप्शन टीम को सौंपी गई थी। प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर जुलाई 2024 में तत्कालीन ग्राम प्रधान और सचिव के खिलाफ कंपिल थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसी क्रम में मंगलवार को एंटी करप्शन टीम कानपुर से पहुंची और डीपीआरओ कार्यालय में पूछताछ की।
एंटी करप्शन टीम ने डीपीआरओ राजेश चौरसिया से धनराशि ट्रांसफर की प्रक्रिया, खर्च के मानक और निगरानी व्यवस्था की जानकारी ली। साथ ही शौचालय लाभार्थियों की सूची और संबंधित अभिलेखों की भी जांच की गई। टीम ने यह भी परखा कि स्वीकृत राशि का उपयोग वास्तविक निर्माण में हुआ या नहीं।
एंटी करप्शन टीम के निरीक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मौके पर बड़ी संख्या में शौचालय बने नहीं पाए गए हैं। लाभार्थियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और विभिन्न बिंदुओं पर छानबीन जारी है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई के लिए सक्षम अधिकारियों को भेजी जाएगी। यह मामला फर्रुखाबाद में पंचायत स्तर पर वित्तीय पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।






