आईआईटी कानपुर कैंपस में फिर छात्र की मौत, 22 दिन में दूसरी आत्महत्या से मचा हड़कंप
Share your love

संवाद 24 कानपुर। प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के कैंपस में एक शोधार्थी ने मंगलवार को आत्महत्या कर ली, जिससे परिसर में शोक और चिंता की लहर दौड़ गई है। यह घटना संस्थान में पिछले 22 दिनों में दूसरी आत्महत्या है, जिससे विद्यार्थियों और प्रशासन दोनों में गहरी आशंका व्याप्त है
घटना के अनुसार, रामस्वरूप ईशराम (25) — जो अर्थ साइंस विभाग में पीएचडी कर रहे थे — उन्होंने कॉलेज के पीएचडी आवासीय अपार्टमेंट की छठवीं मंजिल से छलांग लगाई। उन्हें गंभीर हालत में तत्काल प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके पास से किसी प्रकार का सुसाइड नोट नहीं मिला है।
पुलिस और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जानकारी में यह सामने आया है कि रामस्वरूप काफी समय से मानसिक तनाव और एंजाइटी (चिंता विकार) से पीड़ित थे और कैंपस के मेंटल वेलनेस सेंटर में उनकी काउंसलिंग भी चल रही थी।
परिवार के अनुसार, वे आईआईटी कैंपस में पत्नी और दो वर्षीय बेटी के साथ रह रहे थे और शैक्षणिक साथ ही पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभा रहे थे। अपने करीबी मित्रों ने बताया कि रामस्वरूप ने पिछले कुछ समय से मानसिक संतुलन की चुनौतियों का सामना किया था।
यह घटना IIT कानपुर के लिए चिंता का विषय बन चुकी है क्योंकि 29 दिसंबर 2025 को एक बीटेक छात्र ने भी आत्महत्या कर ली थी। इससे पहले भी यहाँ पिछले कुछ वर्षों में कई छात्र मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कारणों से जान गंवा चुके हैं, जिससे संस्थान में व्यापक चर्चा और नीतिगत कदमों की मांग उठ रही है।
आईआईटी प्रशासन ने फिलहाल आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है। घटना से जुड़े सबूत जुटाने के लिए साइबर, फोरेंसिक और छात्र आवासीय रिकॉर्ड पर भी निगरानी तेज कर दी गई है।
विश्लेषण: एक्सपर्ट्स और मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में तनाव, अकेलापन और भावनात्मक दबाव गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की ओर ले जा सकते हैं, जिनके लिए संस्थागत समर्थन और व्यापक सलाह व सहायता व्यवस्था आवश्यक है।






