20 साल का इंतज़ार खत्म, अब खेतों के बीच गूंजेगी रेल की सीटी, हरदोई–गुरसहायगंज रेल लाइन को मिली हरी झंडी, बदलेगा मध्य यूपी का नक्शा
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संवाद 24 हरदोई। उत्तर प्रदेश के परिवहन मानचित्र पर एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। रेल मंत्रालय ने हरदोई से गुरसहायगंज (कन्नौज) वाया सांडी नई रेल लाइन परियोजना को आधिकारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि हरदोई और कन्नौज के लाखों निवासियों के उस दो दशक पुराने संघर्ष की जीत है, जो एक सुलभ रेल मार्ग की बाट जोह रहे थे। लगभग 1302 करोड़ रुपये के शुरुआती बजट वाली यह परियोजना मध्य उत्तर प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है।
संघर्ष की गाथा: ‘सांडी रेल लाओ संघर्ष समिति’ का योगदान
किसी भी बड़ी उपलब्धि के पीछे जन-आंदोलन की एक लंबी कहानी होती है। इस रेल लाइन के लिए ‘सांडी रेल लाओ संघर्ष समिति’ ने बीते 20 वर्षों से निरंतर मशाल जलाए रखी। समिति के सदस्यों ने स्थानीय कस्बों से लेकर देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर तक अपनी आवाज बुलंद की। हजारों की संख्या में ज्ञापन प्रधानमंत्री कार्यालय और रेल मंत्रालय को भेजे गए। स्थानीय नागरिकों का यह धैर्य और संकल्प ही था जिसने अंततः सरकार को इस परियोजना को प्राथमिकता देने पर विवश किया।
परियोजना का तकनीकी स्वरूप और विस्तार
शुरुआती योजना के अनुसार, हरदोई-गुरसहायगंज रेल लाइन की लंबाई लगभग 59.30 किलोमीटर तय की गई थी। हालांकि, क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए वर्ष 2023 में इसमें संशोधन किया गया। अब इस रेल मार्ग की कुल लंबाई बढ़ाकर 63.70 किलोमीटर कर दी गई है। लंबाई बढ़ने के साथ-साथ इसकी निर्माण लागत में भी वृद्धि हुई है। फाइनल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (FPR) के अनुसार, अब इस परियोजना पर लगभग 1481 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जो इस क्षेत्र के विकास के प्रति रेलवे की गंभीरता को दर्शाता है।
पिंक बुक और बजट आवंटन की प्रक्रिया
रेलवे की कार्यप्रणाली में किसी भी परियोजना का ‘पिंक बुक’ में शामिल होना उसकी आधिकारिक मान्यता का प्रमाण होता है। यह संतोषजनक है कि उत्तर रेलवे की पिंक बुक में वर्ष 2019-20 से ही इस परियोजना को स्थान मिलता रहा है। इसके बाद लगातार 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के रेल बजट में इसे प्राथमिकता दी गई। बजट में लगातार स्थान मिलने से यह स्पष्ट हो गया था कि रेल मंत्रालय इस रूट को रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मान रहा है।
आधुनिक तकनीक का उपयोग: ड्रोन सर्वे और सीमांकन
परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए रेलवे ने आधुनिकतम तकनीकों का सहारा लिया है। वर्ष 2021 में दिल्ली की प्रतिष्ठित ‘मेसर्स ट्रांसलिक कंपनी’ द्वारा ड्रोन तकनीक के जरिए फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) संपन्न किया गया। इस विशेष सर्वे के लिए रेलवे बोर्ड ने 74 लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि स्वीकृत की थी। इसके बाद जनवरी 2022 में हरदोई से लेकर गुरसहायगंज तक के दर्जनों गांवों में पिलर (सीमांकन पोल) लगाने का कार्य पूरा किया गया, जिससे रेल पटरी बिछाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
प्रस्तावित स्टेशन: ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों का कायाकल्प
इस नई रेल लाइन के बिछने से कई ऐसे इलाके मुख्यधारा से जुड़ेंगे जो अब तक केवल सड़क मार्ग पर निर्भर थे। परियोजना के अंतर्गत हरदोई करना, हरदोई ब्लॉक हट, कुतवापुर, पिंडारी, सांडी, भदार, सिया, चचासांडा और अंत में गुरसहायगंज जैसे प्रमुख स्टेशनों का निर्माण प्रस्तावित है। इन स्टेशनों के बनने से स्थानीय ग्रामीणों को लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए बड़े शहरों तक जाने की मजबूरी से मुक्ति मिलेगी।
आर्थिक प्रभाव: व्यापार और रोजगार के नए अवसर
रेलवे लाइन न केवल यात्रियों को ढोती है, बल्कि समृद्धि भी लाती है। हरदोई और कन्नौज दोनों ही कृषि प्रधान जिले हैं। सांडी और गुरसहायगंज जैसे इलाकों में किसानों की फसलों, विशेषकर आलू और अनाज को बड़ी मंडियों तक पहुँचाने में यह रेल मार्ग गेम-चेंजर साबित होगा। मालगाड़ियों के आवागमन से परिवहन लागत कम होगी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही, स्टेशनों के आसपास विकसित होने वाले नए बाजार स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के हजारों अवसर पैदा करेंगे।
सामाजिक और पर्यटन विकास: सांडी पक्षी विहार को बढ़ावा
हरदोई का सांडी क्षेत्र अपने ‘सांडी पक्षी विहार’ के लिए विश्व प्रसिद्ध है। रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने से यहाँ पर्यटन की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाएंगी। देश-विदेश के पर्यटक आसानी से यहाँ पहुँच सकेंगे, जिससे स्थानीय पर्यटन उद्योग को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, शिक्षा और चिकित्सा के लिए हरदोई या कानपुर जाने वाले छात्रों और मरीजों के लिए यह सफर अब कम समय और कम खर्च में पूरा हो सकेगा।
सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ते कदम
हरदोई-गुरसहायगंज रेल लाइन परियोजना महज एक घोषणा नहीं, बल्कि क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का ब्लूप्रिंट है। 1302 करोड़ से लेकर 1481 करोड़ रुपये तक का यह निवेश आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित होगा। आरटीआई से प्राप्त जानकारियों और धरातल पर हो रहे कार्यों से यह स्पष्ट है कि बहुत जल्द रेल की सीटी इन खेतों और खलिहानों के बीच गूंजेगी।






