तंदूरी रोटी: घर पर तवे या ओवन जैसी स्वादिष्ट रोटी बनाने की संपूर्ण विधि

संवाद 24 डेस्क। भारतीय भोजन परंपरा में रोटी का विशेष स्थान है। उत्तर भारत से लेकर देश के अन्य हिस्सों तक, रोटी केवल भोजन नहीं बल्कि संस्कृति का प्रतीक मानी जाती है। इन्हीं रोटियों में तंदूरी रोटी एक ऐसा नाम है, जो स्वाद, सुगंध और बनावट—तीनों के लिए प्रसिद्ध है। आमतौर पर तंदूरी रोटी होटल या ढाबों में तंदूर (मिट्टी के भट्ठे) में बनाई जाती है, लेकिन बदलती जीवनशैली और घरेलू रसोई की सीमाओं के बावजूद अब इसे घर पर भी तवे या ओवन में तैयार किया जा सकता है। यह लेख घर पर तंदूरी रोटी बनाने की संपूर्ण, व्यावहारिक और प्रमाणिक विधि को विस्तार से प्रस्तुत करता है।

तंदूरी रोटी क्या है
तंदूरी रोटी मुख्य रूप से गेहूँ के आटे से बनाई जाने वाली मोटी रोटी होती है, जिसे अत्यधिक तापमान पर तंदूर की दीवारों से चिपकाकर पकाया जाता है। इसकी खासियत इसका हल्का जला हुआ बाहरी भाग, अंदर से नरम बनावट और विशिष्ट धुएँ की खुशबू होती है। पारंपरिक रूप से इसमें खमीर या दही का प्रयोग किया जाता है, जिससे रोटी फूली हुई और हल्की बनती है।

आवश्यक सामग्री का महत्व
तंदूरी रोटी की गुणवत्ता काफी हद तक उपयोग की गई सामग्री पर निर्भर करती है। गेहूँ का आटा इसमें मुख्य घटक है, जो रोटी को पोषण और मजबूती प्रदान करता है। दही आटे में नमी और हल्की खट्टास लाता है, जिससे रोटी नरम बनती है। बेकिंग सोडा गैस पैदा कर आटे को हल्का करता है, जिससे रोटी तंदूर जैसी फूली हुई प्रतीत होती है। तेल या घी आटे की लोच बढ़ाने में सहायक होता है, जबकि नमक और चीनी स्वाद को संतुलित करते हैं।

आटा गूंथने की वैज्ञानिक भूमिका
तंदूरी रोटी के लिए आटे का सही तरीके से गूंथा जाना अत्यंत आवश्यक है। जब आटे में दही, सोडा और तेल मिलाकर गुनगुने पानी से आटा गूंथा जाता है, तो ग्लूटेन सक्रिय होता है। इससे आटा लचीला बनता है और रोटी पकने के दौरान टूटती नहीं है। आटे को 1 से 2 घंटे तक ढककर रखने से उसमें प्राकृतिक किण्वन (fermentation) होता है, जिससे रोटी हल्की और पचने में आसान बनती है।

आटे को आराम देना क्यों ज़रूरी है
गूंथे हुए आटे को विश्राम देना तंदूरी रोटी की सफलता का एक अहम चरण है। इस दौरान आटे में नमी समान रूप से फैलती है और दही व सोडा अपना प्रभाव दिखाते हैं। परिणामस्वरूप, पकाते समय रोटी बेहतर तरीके से फूलती है और उसकी बनावट होटल जैसी हो जाती है।

आवश्यक सामग्री
• गेहूँ का आटा – 2 कप
• दही – ¼ कप
• बेकिंग सोडा – ¼ छोटी चम्मच
• नमक – स्वादानुसार
• चीनी – एक चुटकी
• तेल या घी – 1 बड़ा चम्मच
• गुनगुना पानी – आवश्यकतानुसार
• मक्खन/घी – लगाने के लिए

तंदूरी रोटी बनाने की विधि (तवे पर)

  1. आटा गूंथना
    एक बड़े बर्तन में गेहूँ का आटा, नमक, चीनी और बेकिंग सोडा मिलाएँ। इसमें दही और तेल डालें। अब गुनगुने पानी की मदद से नरम और चिकना आटा गूंथ लें।आटे को ढककर कम से कम 1–2 घंटे के लिए रख दें, ताकि वह हल्का फूल जाए और रोटियाँ नरम बनें।
  2. लोइयाँ बनाना
    आटे से मध्यम आकार की लोइयाँ बना लें। ध्यान रखें कि लोई बहुत छोटी न हो, क्योंकि तंदूरी रोटी सामान्य चपाती से थोड़ी बड़ी और मोटी होती है।
  3. रोटी बेलना
    लोई को सूखे आटे में लपेटकर गोल या हल्का अंडाकार आकार में बेलें। रोटी को सामान्य रोटी से थोड़ा मोटा रखें, ताकि तेज़ आंच पर भी वह नरम बनी रहे।
  4. पानी लगाना
    बेली हुई रोटी की एक तरफ हल्का पानी लगाएँ। यह पानी रोटी को तवे से चिपकाने में मदद करता है और तंदूर जैसा प्रभाव देता है।
  5. तवे पर सेंकना
    लोहे के तवे को तेज़ आंच पर अच्छी तरह गरम करें।
    अब रोटी की पानी लगी सतह को नीचे की ओर रखते हुए तवे पर चिपका दें।जब ऊपर की सतह पर बुलबुले दिखने लगें, तो तवे को उल्टा करके सीधे गैस की आंच पर पकड़ें और रोटी को सुनहरा व हल्का जला हुआ होने तक सेकें।
  6. मक्खन लगाना
    रोटी को तवे से निकालें और ऊपर से मक्खन या घी लगाएँ। गरमागरम परोसें।

ओवन में तंदूरी रोटी बनाने की विधि
1. ओवन को पहले से 250°C पर प्रीहीट करें।
2. बेली हुई रोटी को बेकिंग ट्रे या सीधे ओवन रैक पर रखें।
3. 6–8 मिनट तक बेक करें, जब तक रोटी फूलकर हल्की सुनहरी न हो जाए।
4. अंत में 1–2 मिनट के लिए ग्रिल मोड पर रखें, ताकि ऊपर से तंदूरी रंग और स्वाद आ जाए।
5. निकालकर मक्खन लगाएँ और परोसें।

तंदूरी रोटी के साथ परोसने के सुझाव
तंदूरी रोटी को दाल मखनी, शाही पनीर, कढ़ाही सब्ज़ी, चना मसाला या किसी भी ग्रेवी वाली सब्ज़ी के साथ परोसा जा सकता है। सलाद और हरी चटनी इसके स्वाद को और निखारते हैं।

स्वास्थ्य की दृष्टि से तंदूरी रोटी
गेहूँ के आटे से बनी तंदूरी रोटी फाइबर से भरपूर होती है। घर पर बनाई गई रोटी में अत्यधिक मक्खन या रिफाइंड आटे का प्रयोग नहीं होता, जिससे यह अपेक्षाकृत अधिक स्वास्थ्यवर्धक बनती है। दही के कारण यह पाचन में भी सहायक होती है।

आम गलतियाँ और उनके समाधान
अक्सर रोटी तवे से गिर जाती है या ठीक से फूलती नहीं है। इसका कारण तवे का पर्याप्त गरम न होना या पानी कम लगाना हो सकता है। वहीं, बहुत पतली रोटी बनाने से वह जल्दी जल जाती है। सही तापमान और मोटाई का ध्यान रखकर इन समस्याओं से बचा जा सकता है।

खास टिप्स
• तवा जितना गरम होगा, रोटी उतनी ही अच्छी बनेगी।
• रोटी बहुत पतली न बेलें।
• लोहे का तवा तंदूरी रोटी के लिए सबसे बेहतर होता है।

Radha Singh
Radha Singh

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