कारगिल पार्क की सुरक्षा पर सवाल: 24 घंटे पहरे के बावजूद 4.16 लाख की चोरी और लीपापोती के आरोप
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संवाद 24 संवाददाता । कानपुर का कारगिल पार्क, जिसे शहर के गौरव और शहीदों की स्मृति से जोड़ा जाता है, आज सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक और प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बनता दिख रहा है। 24 घंटे तैनात पूर्व सैनिकों की मौजूदगी के बावजूद चोर बेखौफ होकर 4.16 लाख रुपये कीमत के 16 स्पीकर उखाड़ ले गए। हैरानी की बात यह है कि घटना के 11 दिन बाद भी न तो चोरों का सुराग मिला और न ही सीसीटीवी फुटेज की ठोस जांच सामने आई। उलटे, मामले में “लीपापोती” की कोशिशों के आरोप लग रहे हैं।
पांच साल पहले कानपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड
(केएससीएल) ने करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से कारगिल पार्क का सुंदरीकरण कराया था। विश्व स्तरीय सुविधाओं से लैस इस पार्क में सिंथेटिक पाथवे, आकर्षक लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे, चिल्ड्रन पार्क और एलसीडी युक्त कंट्रोल रूम के साथ जेबीएल कंपनी का अत्याधुनिक म्यूजिक सिस्टम लगाया गया। पार्क के चारों ओर कुल 106 स्पीकर पाथवे के किनारे लगाए गए थे, जिनका संचालन कंट्रोल रूम से होता था। यही म्यूजिक सिस्टम पार्क की पहचान और दर्शकों के आकर्षण का केंद्र था—जिस पर अब चोरों ने हाथ साफ कर दिया।
चोरी की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्पीकर केवल उतारे नहीं गए, बल्कि नट-बोल्ट और पेंच खोलकर उनकी भूमिगत केबल तक काट दी गई। यह काम बिना समय और जानकारी के संभव नहीं माना जा रहा, जिससे मिलीभगत की आशंका और गहराती है। पार्क में सुरक्षा के लिए नगर निगम की ओर से 12 पूर्व फौजी तैनात हैं—चार-चार की शिफ्ट में—जिनके वेतन पर हर महीने 2.16 लाख रुपये खर्च होते हैं। इसके बावजूद, स्थानीय लोगों का कहना है कि गार्ड अक्सर मुख्य द्वार के पास कुर्सियां डालकर बैठे रहते हैं और पूरे पार्क की गश्त नहीं करते। यही लापरवाही चोरों के लिए मौका बन गई।
मामले को और संदिग्ध बनाता है सुपरवाइजर की रिपोर्ट, जिसमें 16 की बजाय केवल पांच स्पीकर चोरी होने का उल्लेख किया गया। नगर निगम के उद्यान अधिकारी को भेजे गए पत्र में 20 दिसंबर की रात को पांच स्पीकर चोरी होने की सूचना दी गई, जबकि वास्तविक नुकसान कहीं अधिक बताया जा रहा है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या जानबूझकर घटना को छोटा दिखाने की कोशिश की गई?
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन जरूर दिया है, लेकिन अब तक की सुस्ती प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करती है। स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों खर्च करने के बाद यदि सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं हो पाती, तो यह केवल एक पार्क की चोरी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता है।
कारगिल पार्क की यह घटना शहर के लिए चेतावनी है—कि सुरक्षा केवल तैनाती से नहीं, बल्कि सतर्कता, निगरानी और जवाबदेही से सुनिश्चित होती है। अब देखना यह है कि जांच वास्तव में सच्चाई सामने लाती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।






