थाने में किसान को बेरहमी से पीटकर पैर तोड़ने वाले पुलिसकर्मियों की बढ़ी मुश्किलें, राज्य मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
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संवाद 24 संवाददाता। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के थाना किरावली क्षेत्र में पुलिस हिरासत में एक किसान राजू शर्मा (उम्र करीब 35-42 वर्ष) के साथ हुई बर्बर मारपीट का मामला अब और गंभीर हो गया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता नरेश पारस की शिकायत पर उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए केस दर्ज कर लिया है। आयोग ने जल्द सुनवाई शुरू करने के संकेत दिए हैं और जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की जा सकती है। इससे आरोपी पुलिसकर्मियों पर कानूनी शिकंजा कसने की उम्मीद बढ़ गई है।
यह मामला अगस्त महीने में हुए एक पूर्व फौजी की हत्या के जांच से जुड़ा है। पुलिस दबाव में केस सॉल्व करने के लिए शॉर्टकट अपनाते हुए गांव के किसान राजू शर्मा को पूछताछ के नाम पर थाने बुलाया गया। आरोप है कि 20-21 दिसंबर को राजू को अवैध हिरासत में रखा गया, उल्टा लटकाकर डंडों से बेरहमी से पीटा गया, जिससे उसके दोनों पैरों में गंभीर फ्रैक्चर हो गया। पीड़ित बेहोश हो गया तो पुलिस ने उसे चुपके से निजी अस्पताल में भर्ती कराया और समझौते का दबाव बनाया।
थानाध्यक्ष पर रुपये देकर मामले को दबाने का भी आरोप लगा है।
परिजनों का कहना है कि पुलिस ने पहले राजू के बेटे को हिरासत में लिया और फिर राजू खुद थाने पहुंचे तो उन्हें हवालात में बंद कर टॉर्चर किया गया। मारपीट थानाध्यक्ष नीरज सिंह की मौजूदगी और निर्देश पर हुई। पीड़ित के भतीजे करण शर्मा ने बताया कि परिवार तहरीर देकर एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।
मामला मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आगरा पुलिस कमिश्नरेट ने त्वरित कार्रवाई की। पुलिस आयुक्त ने एसीपी (अछनेरा) रामप्रवेश गुप्ता को पद से हटा दिया। थानाध्याख नीरज सिंह, सब इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह और सिपाही रवि मलिक को निलंबित कर दिया गया। अपर पुलिस आयुक्त राम बदन सिंह को विभागीय जांच सौंपी गई है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता नरेश पारस ने बताया कि उन्होंने ईमेल से शिकायत की थी, जिस पर आयोग ने तुरंत केस दर्ज किया। उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में भी शिकायत भेजी है। उनका कहना है कि यह कस्टोडियल टॉर्चर का गंभीर मामला है, जिसमें आरोपी पुलिसकर्मियों पर हत्या के प्रयास समेत संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
यह घटना यूपी पुलिस की कार्यशैली पर फिर से सवाल उठा रही है। पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए अस्पताल में इलाज करा रहा है, जबकि आयोग की कार्रवाई से पुलिसकर्मियों की मुश्किलें बढ़ना तय मानी जा रही हैं। मामले की आगे की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं।






