चारबाग पर आशा वर्कर्स का जोरदार प्रदर्शन : विधानसभा कूच से पहले 4 थानों की फोर्स ने रोका, बोलीं — डरने वाली नहीं, हक लेकर रहेंगी
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संवाद 24 डेस्क। लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को आशा वर्कर्स ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस के बैनर तले प्रदेश के 75 जिलों से पहुंची आशा वर्कर्स विधानसभा की ओर पैदल मार्च करने की तैयारी में थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
भीषण ठंड के बीच जुटीं आशा वर्कर्स को चारबाग से निकलने से पहले ही चार थानों की पुलिस फोर्स ने चारों तरफ से बैरिकेडिंग कर घेर लिया। इसके बाद स्टेशन परिसर में काफी देर तक नोकझोंक और नारेबाजी होती रही। पुलिस ने किसी भी प्रदर्शनकारी को आगे नहीं बढ़ने दिया, जिसके चलते सभी आशा वर्कर्स वहीं धरने पर बैठ गईं।
प्रदर्शन के दौरान आशा वर्कर्स ने कहा कि वे लंबे समय से पांच सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष कर रही हैं, लेकिन सरकार और विभाग की ओर से कोई ठोस सुनवाई नहीं हो रही है। प्रदर्शनकारियों ने “2000 में गुजारा नहीं, 20 हजार से कम मंजूर नहीं” जैसे नारे भी लगाए।

आशा वर्कर्स की प्रमुख 5 मांगें
- 45वें/46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुसार राज्य स्वास्थ्यकर्मी का दर्जा, न्यूनतम वेतन, मातृत्व अवकाश, ईएसआई, पीएफ, ग्रेच्युटी और पेंशन।
- 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख का जीवन बीमा।
- कार्य के निश्चित घंटे तय किए जाएं।
- वर्ष 2017 से लंबित सभी भुगतानों का आकलन कर भुगतान।
- सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी का भुगतान।
“दूसरों का इलाज करते हैं, अपना नहीं करा पा रहे”
कानपुर से आई आशा वर्कर नीतू दीक्षित ने कहा कि वह 2006 से सेवा दे रही हैं। महज 2000 रुपये मानदेय में परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि वे दूसरों के बच्चों का इलाज और देखभाल करती हैं, लेकिन अपने बच्चों की पढ़ाई और इलाज तक ठीक से नहीं करा पा रहीं।
आशा वर्कर्स ने आरोप लगाया कि दीपावली जैसे त्योहार पर भी उन्हें भुगतान नहीं मिला। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों पर वसूली और अनदेखी के आरोप भी लगाए।
फिलहाल चारबाग रेलवे स्टेशन पर आशा वर्कर्स का धरना और नारेबाजी जारी है। प्रशासन की ओर से बातचीत की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन कोई औपचारिक समाधान सामने नहीं आया है।






