कानपुर की IGRS रैंकिंग फिर गिरी: 4 विभागों की लापरवाही से 70 वें स्थान पर धकेला जिला, 48 अफसरों को नोटिस

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संवाद 24संवाददाता। एक महीने पहले सुधरी हुई जिले की आईजीआरएस (इंटीग्रेटेड ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम) रैंकिंग नवंबर में फिर लुढ़क कर 70वें स्थान पर पहुँच गई। अक्टूबर में मेहनत से 63 वाँ स्थान हासिल करने वाला कानपुर जिला महज एक महीने में 114 अंकों के साथ फिर फिसड्डी साबित हुआ है। शासन से आए नेगेटिव फीडबैक ने साफ कर दिया कि जिम्मेदार अफसरों ने ज्यादातर शिकायतें बिना फोन किए, बिना मौके पर जाँच किए, घर बैठे-बैठे ही “निस्तारित” कर दीं। नतीजा शिकायतकर्ता नाराज, फीडबैक खराब और जिले की साख फिर दाँव पर।

सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले चार विभाग
शासन के आँकड़ों में सबसे ज्यादा नेगेटिव फीडबैक चार विभागों के खाते में गया है:
कानपुर नगर निगम
कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए)
जलकल विभाग
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम


इन विभागों के शिकायतकर्ताओं ने सबसे ज्यादा असंतोष जताया। खास तौर पर नगर निगम के अपर नगर आयुक्त (1132 नेगेटिव फीडबैक) और नगर आयुक्त (1103 नेगेटिव फीडबैक) सबसे आगे रहे। इसके बाद क्रमशः दक्षिणांचल विद्युत (248), केडीए सचिव (177), जलकल अधिशासी अभियंता (173) और केडीए वीसी (162) का नंबर आया।

डिफॉल्टर बने विभाग
कुछ विभाग तो शिकायतों को समय पर निस्तारित करने में भी पूरी तरह फेल रहे। इनमें शामिल हैं:
नगर निगम – 7 शिकायतें डिफॉल्टर
प्रभागीय वन अधिकारी – 6
लीड बैंक मैनेजर – 6
जल निगम अधिशासी अभियंता – 5
बीएसए – 5

48 अफसरों को नोटिस, सख्त कार्रवाई की चेतावनी
खराब रैंकिंग और नेगेटिव फीडबैक की समीक्षा के बाद एडीएम सिटी डॉ. राजेश कुमार ने तुरंत एक्शन लिया। कुल 48 अधिकारियों-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण माँगा गया है। डॉ. राजेश कुमार ने साफ कहा, “ज्यादातर शिकायतें बिना फोन किए, बिना साइट विजिट किए निस्तारित की गईं। अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

जनता अब और बर्दाश्त करने के मूड में नहीं
शहर में सीवर जाम, पानी की किल्लत, बिजली कटौती और अतिक्रमण जैसी समस्याएँ सालों से चली आ रही हैं। लोग ऑनलाइन शिकायत दर्ज करते हैं, लेकिन जब अफसर बिना कुछ किए “हल” कर देते हैं तो जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच जाता है। यही वजह है कि नेगेटिव फीडबैक की बाढ़ आई और जिले की रैंकिंग धड़ाम हो गई।

अब सवाल यह है कि क्या नोटिस और चेतावनी से अफसरों की कार्यशैली बदलेगी या फिर कानपुर को अगले महीने भी फिसड्डी सूची में जगह बनानी पड़ेगी? जनता की निगाहें एडीएम सिटी के अगले कदम पर टिकी हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस बार सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, जमीनी हकीकत सुधरेगी।

Pavan Singh
Pavan Singh

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