कानपुर देहात में अवैध मिट्टी खनन अनियंत्रित: सरकारी जमीनें भी नहीं बचीं, प्रशासन की निष्क्रियता पर उठे सवाल

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संवाद 24 संवाददाता। कानपुर देहात में अवैध मिट्टी खनन एक गंभीर समस्या के रूप में तेजी से उभर रहा है। सरकारी चेतावनियों और नियमों के बावजूद खनन माफिया लगातार सक्रिय हैं, जिससे न केवल सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरण और स्थानीय भू-स्तर पर भी गहरा प्रभाव पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह अवैध कारोबार सरकारी जमीनों पर भी बेखौफ हो रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी इससे अनजान बने हुए हैं या कार्रवाई से बचते दिख रहे हैं।

ईंट भट्टों की अनुमति का दुरुपयोग, मानक से अधिक गहरी खुदाई सूत्रों के अनुसार, ईंट भट्टों को मिली आधिकारिक मिट्टी खनन अनुमति का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है। जहां मानकों के तहत सीमित गहराई तक खुदाई की अनुमति होती है, वहीं कई स्थानों पर 4 से 5 फीट तक गहरी खुदाई की जा रही है। यही नहीं, एक ही भट्टे की अनुमति का उपयोग कर मिट्टी को कई अन्य भट्टों पर भी सप्लाई किया जा रहा है, जिससे माफिया को दोहरा फायदा मिल रहा है।

सरकारी जमीनों पर खनन, अधिकारियों की चुप्पी सवालों के घेरे में सिकंदरा और डेरापुर तहसील क्षेत्रों में अवैध मिट्टी खनन धड़ल्ले से चल रहा है। सबसे चिंताजनक उदाहरण तब सामने आया जब सिकंदरा तहसील के डेरापुर थाना क्षेत्र के जरौली गांव में ग्राम प्रधान ने सुरक्षित सरकारी भूमि से मिट्टी खनन करवाया। पेशेवर स्तर पर की गई यह खुदाई अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही का बड़ा संकेत मानी जा रही है। धरमपुर गांव में भी इसी प्रकार का मामला सामने आ चुका है, जो खतरे की घंटी है।

डंपरों से मिट्टी की अवैध सप्लाई, कई महीनों से जारी खेलकई स्थानों पर स्थानीय लोग अपनी खेतों की मिट्टी तक बेच रहे हैं। यह मिट्टी डंपरों के जरिए प्लाट भराई, होटल निर्माण, लॉजों और रेलवे लाइनों के किनारे चल रहे ठेकेदारों तक भेजी जा रही है। पिछले कई महीनों से यह अवैध कारोबार लगातार जारी है, लेकिन न पुलिस और न ही खनन विभाग इसे रोक पाने में सफल हुआ है।

पहले भी उजागर हुआ था तालाब खनन का मामलाडेरापुर क्षेत्र में इससे पहले भी तालाब से दिनदहाड़े मिट्टी खनन का मामला सामने आया था। मीडिया की रिपोर्ट के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की थी, लेकिन कुछ समय बाद फिर वही स्थिति लौट आई। इससे साफ है कि कार्रवाई का असर केवल कुछ दिनों का होता है, जबकि माफिया की पकड़ मजबूत और लगातार सक्रिय रहती है।

अधिकारी बोले– जांच जारी, जल्द होगी कार्रवाईमामले पर प्रतिक्रिया देते हुए उपजिलाधिकारी सिकंदरा प्रद्युम्न कुमार ने बताया कि अवैध खनन की जांच की जा रही है। उनके अनुसार, “जांच के बाद स्थिति स्पष्ट की जाएगी और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित होगी।”हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई तभी प्रभावी होगी जब प्रशासन लगातार निगरानी और सख्त प्रवर्तन अपनाएगा

कानपुर देहात में अवैध मिट्टी खनन सिर्फ एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सरकारी संपत्तियों की खुली लूट है। इसकी अनदेखी न केवल सरकारी विभागों पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि यह भविष्य में पर्यावरण, भूमि संरक्षण और जनहित पर भी गहरा प्रभाव डाल सकती है। जरूरत है कि प्रशासन ईमानदारी और तत्परता से कार्रवाई करे, ताकि खनन माफिया का नेटवर्क टूट सके और सार्वजनिक संसाधनों की रक्षा हो सके।

Pavan Singh
Pavan Singh

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