साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर 42.50 लाख रुपये उड़ाए
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संवाद 24 संवाददाता। कानपुर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बर्रा क्षेत्र में रहने वाले पावर ग्रिड कॉरपोरेशन से सेवानिवृत्त इंजीनियर राजेंद्र प्रसाद सिंह को साइबर अपराधियों ने करीब 20 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर उनसे 42.50 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस की जांच में अब बड़ा खुलासा हुआ है, जिन पाँच खातों में पैसा भेजा गया था, उनमें सिर्फ 2200 रुपये ही पाए गए हैं।
20 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट – सीबीआई अधिकारी बनकर किया गया धोखाजूही कलां W-2 स्थित शिवम एन्क्लेव में रहने वाले राजेंद्र प्रसाद को 7 से 26 अगस्त के बीच लगातार साइबर अपराधियों ने जाल में फँसाए रखा। ठगों ने व्हाट्सऐप वीडियो कॉल की, खुद को सीबीआई का आईपीएस अधिकारी बताया, जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल के मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में उनके आधार कार्ड के दुरुपयोग का झूठा आरोप लगाया और फिर कार्रवाई व जेल भेजने की धमकी देकर उन्हें डराया।
डरे-सहमे इंजीनियर ने 11 से 21 अगस्त के बीच पाँच अलग-अलग खातों में आरटीजीएस के जरिए 42.50 लाख रुपये भेज दिए। सबसे बड़ा ट्रांसफर मुंबई की एक कंपनी को साइबर सेल की जांच में पता चला कि 24 लाख रुपये मुंबई की एक प्राइवेट कंपनी के चालू खाते में डाले गए, जबकि बाकी रकम चार अलग-अलग बचत खातों में भेजी गई।
पैसे ट्रांसफर होने के बाद ठगों ने धीरे-धीरे सभी राशियाँ निकाल लीं। जांच में बड़ा खुलासा पाँच खातों में सिर्फ 2200 रुपये एडीसीपी दक्षिण योगेश कुमार ने बताया कि जिन पाँच खातों में रकम भेजी गई थी, उनमें अब सिर्फ 2200 रुपये ही बचे पाए गए हैं। सभी खातों को तुरंत होल्ड कर दिया गया है। अब बैंक से खाताधारकों की पहचान, उनके पते और लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है ताकि असली साइबर ठगों तक पहुँचा जा सके।
पुलिस की चुनौती – रकम का पीछा कर पकड़ना होगा नेटवर्क साइबर ठग आम तौर पर खातों से पैसा तुरंत ई-वॉलेट, क्रिप्टो या नकद निकासी के जरिए गायब कर देते हैं। इस मामले में भी बड़े पैमाने पर फंड डायवर्जन हुआ है। जांच टीम को उम्मीद है कि डिजिटल ट्रेल और खातों की गतिविधियों से ठगों की पहचान की जा सकेगी।
डिजिटल अरेस्ट नया तरीका, बड़ी ठगी – “डिजिटल अरेस्ट” यानी कॉल या वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से कैद कर लेना। ठग लगातार कॉल पर बने रहते हैं, ताकि व्यक्ति किसी से बात न कर सके, पुलिस न जा सके और उनके निर्देशों का पालन करता रहे। इंजीनियर राजेंद्र प्रसाद इस मनोवैज्ञानिक दबाव में आकर ठगी का शिकार हो गए।






