बृजेंद्र स्वरूप पार्क में बने मंगल भवन के उद्घाटन पर विवाद तेज, प्रोटोकॉल बदलने से उठा सियासी तूफ़ान
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संवाद 24 संवाददाता। कानपुर के बृजेंद्र स्वरूप पार्क में नगर निगम और जेसीआई द्वारा निर्मित किए गए मंगल भवन के उद्घाटन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पहले निर्माण को लेकर सवाल उठे, और अब उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर भी राजनीति गरमा गई है। सबसे बड़ा विवाद तब उठा जब रक्षा मंत्री के उद्घाटन कार्यक्रम का जिक्र अचानक नए प्रोटोकॉल से गायब हो गया।
पुराना प्रोटोकॉल: रक्षा मंत्री को करना था उद्घाटन नगर निगम अधिकारियों ने बताया था कि केंद्रीय रक्षा मंत्री शाम पाँच बजे मंगल भवन का लोकार्पण करेंगे। इसका आधिकारिक प्रोटोकॉल भी जारी हो चुका था। इससे कार्यक्रम को लेकर हलचल बढ़ गई थी। लेकिन रात में आया नया प्रोटोकॉल, उद्घाटन गायब रात में अचानक नया प्रोटोकॉल जारी हुआ, जिसमें हैरानी की बात यह रही कि रक्षा मंत्री के मंगल भवन उद्घाटन का कोई उल्लेख ही नहीं था।
दूसरी ओर, प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय का प्रोटोकॉल यथावत रहा। उनके उद्घाटन कार्यक्रम का समय शाम चार बजे ही तय है। इस बदलाव ने पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना दिया।सांसद ने उठाए सवाल “यह साजिश है” भाजपा सांसद रमेश अवस्थी ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि मंगल भवन के लिए पार्क की जमीन को गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है। नगर निगम ने साजिश के तहत पार्क के भीतर निर्माण कर दिया। रक्षा मंत्री से उद्घाटन कराकर अपनी गलती पर “मोहर” लगवाने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने कहा कि यह मामला जनता के अधिकारों पर सीधा प्रहार है और इसकी उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सांसद का दावा है कि अगर जांच सही ढंग से हुई तो “कई सफेदपोश लोग” बेनकाब होंगे। मंगल भवन पहले भी सवालों में इससे पहले भी सांसद अवस्थी ने दिशा (DISHA) की बैठक में निर्माण की वैधता,पार्क क्षेत्र का उपयोग,संभावित आय की पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाए थे। उनका कहना है कि जनता के लिए बने पार्क को “निजी हितों” के लिए इस्तेमाल करना गलत है।
अधिकारियों की चुप्पी बढ़ा रही शंकाए प्रोटोकॉल में रक्षा मंत्री का नाम हटने की वजह पर कोई अधिकारी बयान देने को तैयार नहीं है। इससे विवाद और गहरा गया है। भाजपा के भीतर भी इस पर दो राय दिख रही है कुछ लोग निर्माण को उचित मानते हैं, वहीं दूसरा पक्ष इसे गलत ठहरा रहा है।
अब जाँच ही देगी जवाब इस पूरे विवाद में कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं, रक्षा मंत्री का उद्घाटन कार्यक्रम अचानक क्यों हटाया गया?क्या पार्क की जमीन पर निर्माण सही प्रक्रिया से किया गया? क्या निर्माण में निजी हित या दबाव शामिल है? और क्या राजनीतिक लाभ के लिए बड़े नामों का इस्तेमाल किया गया? जैसे-जैसे यह मामला आगे बढ़ रहा है, यह स्पष्ट है कि मंगल भवन सिर्फ एक निर्माण नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद बन चुका है, जिसकी परतें अब खुलनी बाकी हैं।






