दिल्ली ब्लास्ट की जांच में बड़ा खुलासा: डॉ. शाहीन का यूपी कनेक्शन और थार की संदिग्ध मूवमेंट ने बढ़ाई चिंताएँ
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संवाद 24 कानपुर। दिल्ली ब्लास्ट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, डॉ. शाहीन से जुड़े नए खुलासे सुरक्षा एजेंसियों को लगातार चौंका रहे हैं। गिरफ्तारी के बाद शुरुआती पूछताछ में जिन मूवमेंट्स की जानकारी सामने आई थी, अब उससे भी अधिक गंभीर संकेत अगस्त 2025 में रिकॉर्ड हुई एक हाईटेक ढाबे की सीसीटीवी फुटेज से मिले हैं।
कश्मीर नंबर की थार में यूपी के शहरों की रेकी का आरोप फुटेज में डॉ. शाहीन जम्मू-कश्मीर नंबर की थार में चार कश्मीरी युवकों के साथ देखी गई है। यह वाहन इटावा एक्सप्रेसवे के एक ढाबे पर कुछ देर रुका था, जहां कैमरों ने शाहीन को नकाब, ब्राउन टॉप, नीली जींस और स्पोर्ट्स शूज़ पहने हुए कैप्चर किया।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि वह एक ऐसे फोन पर बात करती दिखाई दी, जिसका डिज़ाइन सामान्य मोबाइल से बिल्कुल अलग था। एजेंसियों को शक है कि यह किसी प्रकार का स्क्रैंबलर या इंटरसेप्शन-प्रूफ डिवाइस हो सकता है। फुटेज में थार की सीटों के बीच रखा एक बड़ा लकड़ी का बक्सा भी दिखा, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को और सतर्क कर दिया है। आशंका है कि यह किसी हाईटेक हथियार या संवेदनशील सामग्री से जुड़ा हो सकता है। थार को चलाने वाला युवक पारंपरिक कश्मीरी लिबास में था, जिससे यह संदेह मजबूत होता है कि यह पूरी गतिविधि एक संगठित मिशन का हिस्सा रही होगी।
जांच में पाया गया कि वाहन अनंतनाग की नादिया नामक महिला के नाम पंजीकृत है, जबकि उसका फास्टैग अहान नाम के व्यक्ति के उपयोग से सक्रिय किया गया था। एजेंसियों को आशंका है कि दोनों ही उस वाहन में मौजूद थे। थार की लोकेशन डेटा से पता चला कि वाहन बारा टोल पार करके सीधे कानपुर की ओर गया। फुटेज की पुष्टि होने के बाद एजेंसियों ने दो दिनों तक कानपुर, लखनऊ और वाराणसी में गोपनीय सर्च अभियान चलाया।
डॉ. शाहीन की निशानदेही पर कानपुर से तीन और लखनऊ से दो लोगों को बिना शोर-शराबे के हिरासत में लिया गया और उन्हें दिल्ली स्पेशल सेल को सौंप दिया गया। परिवारों को भी शुरुआती तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गई।
कानपुर में हिरासत में लिए गए तीन युवकों को जब शाहीन के सामने लाया गया, तो तीनों ने तत्काल “आपा सलाम वालेकुम” कहकर सिर झुका लिया। इससे एजेंसियों को अंदेशा हुआ कि शाहीन का प्रभाव और उसका नेटवर्क काफी मजबूत और अनुशासित था। हिरासत में लिए गए युवकों ने खुद को दिहाड़ी मजदूर बताया, लेकिन उनके घरों में तीन-तीन एसी, बड़े स्क्रीन टीवी, महंगा फर्नीचर, और कई लग्जरी आइटम मिले, जो उनकी बताई पहचान से मेल नहीं खाते।
लखनऊ में भी यही पैटर्न देखने को मिला। कानपुर में शालीन छवि, बाहर निकलते ही बदल जाती थी लाइफस्टाइल जांच में पता चला कि कानपुर में रहते हुए शाहीन अपने धार्मिक और सामाजिक छवि पर विशेष ध्यान देती थी। वह महिलाओं को धार्मिक आधार पर जोड़ती थी और खुद को एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत करती थी। लेकिन शहर से बाहर निकलते ही उसकी जीवनशैली पूरी तरह अलग थी—वेस्टर्न आउटफिट, महंगे ब्रांड्स, परफ्यूम्स और लग्जरी ट्रैवल उसका सामान्य हिस्सा थे।
उसके पासपोर्ट पर कई देशों के वीज़ा मिले, जिससे साफ है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार मूवमेंट में रहती थी। लखनऊ में उसके मायके वालों ने भी बाद में उससे दूरी बना ली थी। राजनीतिक कनेक्शन की भी जांच सूत्रों के मुताबिक शाहीन के कुछ राजनीतिक नामों से भी संपर्क के संकेत मिले हैं। हालांकि एजेंसियों ने सुरक्षा कारणों से किसी नेता का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन जिन हाई-क्लास संपर्कों का उसने जिक्र किया है, उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
हाईटेक हथियारों की खोज में जुटी एजेंसियां थार में रखे लकड़ी के बक्से को लेकर एजेंसियां सबसे ज्यादा सतर्क हैं। जांच टीमें अब यह पता लगा रही हैं, बक्सा कहां उतारा गया? क्या इसे किसी अन्य वाहन में बदला गया?क्या यह रास्ते में डाइवर्ट किया गया? और क्या यूपी में किसी बड़े हथियार ट्रांजिट की तैयारी चल रही थी? कानपुर और लखनऊ के कई ठिकानों की सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जा रहा है।






