कानपुर में चलती स्लीपर बस में भीषण आग: दो सिपाहियों ने 43 जानें बचाकर दिखाया साहस

Share your love

संवाद 24 कानपुर। नगर में शुक्रवार सुबह एक बड़ा हादसा टल गया, जब दिल्ली से बनारस जा रही पलक ट्रैवल्स की स्लीपर बस अचानक आग का गोला बन गई। रामादेवी फ्लाईओवर पर बस में आग लगते ही अंदर चीख-पुकार मच गई। 43 यात्री धुएं और लपटों के बीच फंस चुके थे।

पुरुष किसी तरह कूदकर नीचे आए, लेकिन महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग अंदर ही छटपटा रहे थे। इस बीच ड्राइवर और कंडक्टर मौके से भाग गए। ऐसे में पास ही ड्यूटी पर मौजूद दो पुलिसकर्मी—कॉन्स्टेबल पुष्पेंद्र और साहिल खान—मौके पर दौड़े। बस की छत तक पहुंच चुकी लपटों को देखते हुए भी दोनों सिपाही जान जोखिम में डालकर अंदर घुस गए।

कई महिला यात्रियों के कपड़े फंस रहे थे, कुछ लोग अपना सामान बचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन दोनों सिपाहियों ने आवाज लगाई “सामान छोड़ो, जान बचाओ… आग बढ़ रही है!” दोनों ने बच्चों, बुजुर्गों और एक गर्भवती महिला को गोद में उठाकर बाहर निकाला।

कुछ ही मिनटों में धुआं इतना फैल गया कि उनका खुद का दम घुटने लगा, पर वे रुकने वाले नहीं थे। किसी ने बताया कि एक बच्चा अंदर रह गया है तो वे दूसरी बार भी जलती बस में घुस गए। खोजबीन के बाद पता चला कि बच्चा बाहर था।

कॉन्स्टेबल साहिल ने भावुक होकर कहा अगर हम 2–3 मिनट भी देर कर देते, तो कई लोग जिंदा जल सकते थे.”उधर बस में रखा यात्रियों का लगभग सारा सामान—नकदी, ज्वैलरी, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक आइटम—जलकर राख हो गया।

यात्रियों ने आरोप लगाया कि बस ओवरलोड थी और ऊपर अनावश्यक सामान रखा गया था, जिससे आग लगी। हादसे की वजह से हाईवे पर करीब 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियों ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बस का ढांचा ही बचा था।

नुकसान का आंकलन अभी जारी है।हादसे के बीच सबसे बड़ी राहत यह रही कि 43 में से एक भी यात्री की जान नहीं गई।और इसका श्रेय जाता है उन दो बहादुर सिपाहियों को, जिन्होंने ड्यूटी से ऊपर उठकर मानवता का कर्तव्य निभाया।

Pavan Singh
Pavan Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News