स्मार्ट मीटर बना सिरदर्द: रिचार्ज खत्म होते ही अंधेरे में डूबे हजारों घर
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गाजियाबाद में स्मार्ट मीटर व्यवस्था लागू होने के बाद उपभोक्ताओं की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती नजर आ रही हैं। जिले में करीब 2.4 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 80 प्रतिशत को प्रीपेड प्रणाली में बदल दिया गया है। मोबाइल रिचार्ज जैसी इस नई व्यवस्था ने आम लोगों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
रिचार्ज खत्म, बिजली बंद: 3 दिन में 4000 घर अंधेरे में
प्रीपेड सिस्टम लागू होते ही स्थिति यह बनी कि केवल तीन दिनों के भीतर करीब 4000 उपभोक्ताओं की बिजली सप्लाई अपने आप कट गई। आंकड़ों के अनुसार जोन-प्रथम में 2048, जोन-द्वितीय में 778 और जोन-तृतीय में 1742 कनेक्शन बंद हुए हैं। इसके अलावा 500 से अधिक उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके कनेक्शन कटने का खतरा अभी भी बना हुआ है।
न समझ आ रहा सिस्टम, न मिल रही सही जानकारी
सबसे बड़ी समस्या यह सामने आ रही है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ता यह नहीं समझ पा रहे हैं कि मीटर में बैलेंस कैसे डाला जाए या नेगेटिव बैलेंस को पॉजिटिव कैसे किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों और बुजुर्ग उपभोक्ताओं के लिए यह समस्या और भी गंभीर हो गई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें न तो समय पर मैसेज मिलते हैं और न ही ऐप के उपयोग की जानकारी दी गई है, जिससे अचानक बिजली कटने की स्थिति बन जाती है।
बिना तैयारी लागू हुआ सिस्टम? उपभोक्ताओं के आरोप
कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर प्रणाली को बिना पर्याप्त जागरूकता और प्रशिक्षण के लागू कर दिया गया।
नंदग्राम के एक निवासी के अनुसार, “हमें यह तक पता नहीं चलता कि कब बैलेंस खत्म हो गया और कब बिजली चली गई। पहले जैसी सुविधा अब नहीं रही।” दूसरे उपभोक्ता ने कहा कि “न तो सही जानकारी दी गई और न ही ऐप चलाना सिखाया गया।”
विभाग का दावा: ऐप और मैसेज से मिल रही पूरी जानकारी
वहीं, बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं को लगातार मोबाइल मैसेज के जरिए जानकारी दी जा रही है। साथ ही “UPPCL स्मार्ट ऐप” के माध्यम से उपभोक्ता अपनी बिजली खपत, बैलेंस और रिचार्ज की स्थिति देख सकते हैं। हालांकि, हकीकत में कई उपभोक्ताओं को यह सुविधाएं सही तरीके से नहीं मिल पा रही हैं।
मोबाइल नंबर अपडेट कराना जरूरी, नहीं तो बढ़ेगी परेशानी
जोन-प्रथम के मुख्य अभियंता पवन अग्रवाल ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने मोबाइल नंबर को बिजली विभाग के रिकॉर्ड में सही करवाएं। गलत या पुराना नंबर दर्ज होने पर उपभोक्ताओं को बैलेंस और बिजली कटने से पहले मिलने वाले अलर्ट नहीं मिल पाते हैं।
तकनीक अच्छी, लेकिन तैयारी अधूरी
स्मार्ट मीटर और प्रीपेड प्रणाली का उद्देश्य पारदर्शिता और नियंत्रण बढ़ाना है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी तैयारी अधूरी नजर आ रही है।
जब तक उपभोक्ताओं को सही जानकारी, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता नहीं मिलेगी, तब तक यह व्यवस्था सुविधा से ज्यादा परेशानी का कारण बनी रहेगी।






