GST चोरी रैकेट का भंडाफोड़: 150 से अधिक फर्ज़ी कंपनियों पर ₹2.5 हज़ार करोड़ की टैक्स चोरी का आरोप
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लखनऊ – उत्तर प्रदेश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) की बड़ी चोरी से जुड़े एक रैकेट का खुलासा हुआ है। 150 से अधिक फर्ज़ी कंपनियाँ ₹2.5 हज़ार करोड़ (लगभग $2.5 बिलियन) से अधिक के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की धोखाधड़ी करने के लिए जाँच के घेरे में हैं।
इस मामले में दो दर्जन से अधिक FIR दर्ज की गई हैं, और धोखाधड़ी का यह जाल लखनऊ, लखीमपुर खीरी, हरदोई और रायबरेली सहित कई जिलों में फैला हुआ है।
धोखाधड़ी का तरीका: फर्ज़ी कंपनियाँ और अवैध ITC क्लेम
जाँच में पता चला है कि यह रैकेट फर्ज़ी कंपनियों के पंजीकरण और उनके माध्यम से अवैध रूप से ITC का दावा करने पर केंद्रित है।
- फर्ज़ी पंजीकरण: कई फर्ज़ी कंपनियाँ गरीब या अनजाने लोगों के आधार, पैन और मोबाइल नंबर का दुरुपयोग करके पंजीकृत की गईं। पंजीकरण के पते पर कार्यालय या तो मौजूद नहीं थे या फर्ज़ी पाए गए।
- ITC की हेराफेरी: यह रैकेट बिना किसी वास्तविक खरीद-बिक्री के GST-I और GST-II डेटा का उपयोग करके फर्ज़ी तरीके से ITC का दावा करता था।
सरकारी कार्रवाई और निगरानी
केंद्र और राज्य GST अधिकारियों ने इस धोखाधड़ी को रोकने के लिए अपनी जाँच तेज कर दी है:
- पंजीकरण रद्द: बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने के बाद कई फर्ज़ी कंपनियों के पंजीकरण रद्द किए जा चुके हैं।
- जाँच में ढिलाई: अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि पंजीकरण के सत्यापन में ढिलाई बरती गई, जिसे नियमतः 30 दिनों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।
वित्तीय प्रभाव
अधिकारी बताते हैं कि इस रैकेट ने कागज़ों पर कंपनियाँ बनाकर और ऑनलाइन रिटर्न दाखिल करके करोड़ों रुपये के ITC का तुरंत लाभ उठाया। इस तरह की धोखाधड़ी से राज्य के राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है।






