यूपी में अप्रैल से महंगी हो सकती है बिजली, 20% तक बढ़ोतरी की संभावना

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संवाद 24, लखनऊ।उत्तर प्रदेश में आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 से बिजली दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। बिजली कंपनियों द्वारा दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) प्रस्ताव को उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद बिजली दर निर्धारण की प्रक्रिया तेज हो गई है।

आयोग ने बिजली कंपनियों से श्रेणीवार टैरिफ प्रस्ताव का विस्तृत ब्योरा भी मांगा है। कंपनियों ने एआरआर दाखिल करते समय अलग से टैरिफ प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया, जिससे दरों में बढ़ोतरी का निर्णय आयोग पर छोड़ दिया गया है। कंपनियों के अनुमान के अनुसार मौजूदा दरों की तुलना में लगभग 12,453 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा सामने आया है, जिसकी भरपाई के लिए औसतन करीब 20 प्रतिशत तक बिजली महंगी हो सकती है।

कंपनियों द्वारा दाखिल एआरआर के अनुसार कुल 1,18,741 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई गई है, जिसमें बिजली खरीद पर लगभग 85,305 करोड़ रुपये तथा स्मार्ट प्रीपेड मीटर संचालन पर करीब 3,837 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान शामिल है। सरकार से 17,100 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद भी कंपनियों ने घाटा दर्शाया है।

नियमानुसार एआरआर स्वीकार होने के बाद आयोग को अधिकतम 120 दिनों के भीतर नई बिजली दरों का निर्धारण करना होता है। इस प्रक्रिया के तहत कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि एआरआर से जुड़े आंकड़े समाचार पत्रों में प्रकाशित कराए जाएं, ताकि उपभोक्ता 21 दिनों के भीतर अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज करा सकें। इसके बाद मार्च में विभिन्न क्षेत्रों में सार्वजनिक सुनवाई आयोजित कर अंतिम दरें तय की जाएंगी।

उधर उपभोक्ता संगठनों ने प्रस्तावित एआरआर पर सवाल उठाते हुए इसे बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किए गए आंकड़ों पर आधारित बताया है और बिजली दरों में बढ़ोतरी का विरोध किया है। उनका कहना है कि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के बजाय दरों में कमी लाने के विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

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