IGCR स्कीम से कानपुर के चर्म उद्योग को लगेंगे नए पंख
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संवाद 24 संवाददाता। केंद्रीय बजट 2026–27 ने देश के औद्योगिक जगत को विकास की नई राह दिखाने का प्रयास किया है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश के कानपुर जैसे पारंपरिक औद्योगिक शहर के लिए यह बजट उम्मीद की एक मजबूत किरण बनकर सामने आया है। वर्षों से संकट से जूझ रहे लेदर (चर्म) उद्योग को बजट में किए गए प्रावधानों से बड़ी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
कानपुर और इसके आसपास करीब एक हजार छोटी-बड़ी लेदर इकाइयां संचालित हैं, जिनमें से कई इकाइयां बीते कुछ वर्षों में बढ़ती लागत, घटते निर्यात और सख्त अंतरराष्ट्रीय मानकों के चलते बंद होने के कगार पर पहुंच गई थीं। लेकिन हाल के महीनों में यूरोपीय देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों और अब बजट में घोषित राहतों से उद्योग के दोबारा पटरी पर लौटने की उम्मीद मजबूत हुई है।
IGCR स्कीम के विस्तार से बढ़ेगा निर्यात
बजट में इम्पोर्ट ऑफ गुड्स एट कंसेशनल रेट ऑफ ड्यूटी (IGCR) स्कीम के विस्तार को लेदर उद्योग के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है। कस्टम नोटिफिकेशन नंबर 2/2026 के तहत अब शू अपर एक्सपोर्टर्स को भी इस योजना में शामिल किया गया है। इससे पहले यह सुविधा केवल लेदर गारमेंट्स, फुटवियर और अन्य लेदर उत्पादों तक सीमित थी।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स के निर्यात को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024–25 में भारत से शू अपर का निर्यात 222 मिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसमें और वृद्धि की संभावनाएं अब और मजबूत हो गई हैं।
समयसीमा बढ़ने से उद्योग को राहत
आईजीसीआर स्कीम के तहत निर्यात की समयसीमा को छह महीने से बढ़ाकर एक वर्ष किया जाना और योजना को 31 मार्च 2028 तक विस्तारित करना भी उद्योग के लिए राहत भरा कदम है। इससे उद्यमियों को उत्पादन और निर्यात की बेहतर योजना बनाने का अवसर मिलेगा, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों को विशेष लाभ होगा।
कस्टम ड्यूटी छूट से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
इसके अलावा टैग, लेबल, स्टिकर, बेल्ट जैसे आयातित इनपुट्स पर कस्टम ड्यूटी में दी गई छूट से उत्पादन लागत घटेगी और भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
उद्योग जगत ने जताया भरोसा
चर्म निर्यात परिषद के पूर्व रीजनल चेयरमैन जावेद इकबाल ने बजट प्रावधानों का स्वागत करते हुए कहा कि आईजीसीआर स्कीम का विस्तार और यूरोपीय बाजारों में मिली राहत कानपुर के पारंपरिक लेदर उद्योग को नई दिशा देगी। इससे निर्यात और रोजगार दोनों में बढ़ोतरी होगी और लंबे समय से ठहराव झेल रहे उद्योग को फिर से गति मिलेगी।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026–27 लेदर उद्योग के लिए न केवल आर्थिक राहत लेकर आया है, बल्कि कानपुर जैसे शहरों में बंद होती इकाइयों के लिए नई उम्मीद और भविष्य की मजबूत नींव भी रखता नजर आ रहा है।






