यूपी में प्रतिबंधित प्लास्टिक होर्डिंग पर पूरी तरह रोक, नई विज्ञापन नियमावली 2026 लागू
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संवाद 24 लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में विज्ञापन व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश नगर निगम (आकाश चिह्न एवं विज्ञापनों का विनियमन) नियमावली–2026 को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस नियमावली को स्वीकृति प्रदान की गई। नई व्यवस्था के तहत शहरों में प्रतिबंधित प्लास्टिक से बने होर्डिंग और विज्ञापनों पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी गई है।
नई नियमावली के अनुसार अब किसी भी भवन या परिसर पर विज्ञापन लगाने से पहले उसे संरचनात्मक इंजीनियर से प्रमाणित कराना अनिवार्य होगा, ताकि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। सरकार का मानना है कि इससे दुर्घटनाओं पर रोक लगेगी और आम जनता की सुरक्षा मजबूत होगी।
मेला, जादू शो, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत समारोह जैसे अस्थायी आयोजनों के प्रचार-प्रसार के लिए अब नगर निगम से अस्थायी विज्ञापन लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना अनुमति लगाए गए विज्ञापनों को अवैध माना जाएगा और उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नियमावली में यह भी प्रावधान किया गया है कि नगर निगमों द्वारा विज्ञापन लगाने का ठेका अधिकतम 12 वर्षों की अवधि के लिए ही दिया जाएगा। इसके लिए नगर आयुक्त की अध्यक्षता में एक तकनीकी समिति गठित की जाएगी, जो विज्ञापनों की अनुमति, संख्या और स्थान का निर्धारण करेगी। सार्वजनिक स्थलों पर सीमित और नियोजित विज्ञापन ही लगाए जा सकेंगे।
सरकार ने इस नीति में डिजिटल माध्यमों और डिजिटल डिस्प्ले को विशेष बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इससे शहरों की सुंदरता बढ़ेगी, पारदर्शिता आएगी और आधुनिक तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही अवैध और असुरक्षित होर्डिंग पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
नई नियमावली से नगर निगमों की विज्ञापन आय में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे अतिरिक्त टैक्स लगाए बिना शहरी विकास कार्यों को गति मिलेगी। सरकार इस नीति को प्रदेश के वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य से जोड़कर देख रही है और मानती है कि विज्ञापन क्षेत्र में निवेश बढ़ने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।






