यूपी में पंचायत चुनाव तय समय पर होंगे, टलने की अटकलों को मंत्री ने किया खारिज
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संवाद 24 लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर चल रही अटकलों के बीच पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि पंचायत चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही कराए जाएंगे। हाल के दिनों में सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि विभिन्न विवादों और प्रशासनिक व्यस्तताओं के चलते पंचायत चुनाव टाले जा सकते हैं।
बीते कुछ समय से प्रयागराज में शंकराचार्य और प्रशासन से जुड़े विवाद, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर उपजा असंतोष और राज्य प्रशासन की व्यस्तता को पंचायत चुनाव टलने की संभावित वजहों के रूप में देखा जा रहा था। इन मुद्दों के कारण यह कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में देरी कर सकती है।
इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस विषय पर चर्चा की है। मंत्री के अनुसार वर्तमान में अधिकारी और कर्मचारी कुछ जरूरी प्रशासनिक कार्यों, जैसे एसआईआर (SIR) से जुड़े कार्यों में व्यस्त हैं, लेकिन जैसे ही यह कार्य पूरे होंगे, पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को तेज कर दिया जाएगा।
ओम प्रकाश राजभर ने मीडिया और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव टालने को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा पंचायत चुनावों को समय पर संपन्न कराने की है और सभी तैयारियां उसी दिशा में की जा रही हैं।
मंत्री राजभर के अनुसार पंचायत चुनाव की प्रक्रिया अप्रैल से जुलाई के बीच पूरी होने की संभावना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय है और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार चुनाव कराए जाएंगे।
वहीं पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण सूची भी एक अहम मुद्दा बना हुआ है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कौन-कौन सी सीटें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होंगी। आरक्षण सूची जारी होने के बाद ही उम्मीदवारों की स्थिति साफ होगी, जिस पर राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों की निगाहें टिकी हुई हैं।
हालांकि सरकार की ओर से शांति दिखाई दे रही है, लेकिन भाजपा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी जैसे प्रमुख राजनीतिक दल जमीनी स्तर पर सक्रिय हैं। संभावित उम्मीदवार गांव-गांव बैठकों का दौर शुरू कर चुके हैं और टिकट की दौड़ तेज हो गई है।






