हैलट की बदहाली जच्चा-बच्चा वार्ड में कुत्ता और सवालों के घेरे में व्यवस्था

Share your love

संवाद 24 संवाददाता। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार कानपुर का हैलट अस्पताल एक बार फिर अपनी बदहाल व्यवस्था के कारण चर्चा में है। इस बार मामला बेहद संवेदनशील है—जच्चा-बच्चा वार्ड जैसे सुरक्षित और नियंत्रित क्षेत्र में एक आवारा कुत्ते का घुस जाना। यह घटना न सिर्फ अस्पताल प्रशासन की लापरवाही उजागर करती है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता भी पैदा करती है।

जच्चा-बच्चा वार्ड वह स्थान होता है, जहां नवजात शिशु, प्रसूता महिलाएं और गंभीर देखभाल की जरूरत वाले मरीज भर्ती रहते हैं। ऐसे में वहां किसी भी बाहरी तत्व, खासकर आवारा पशु की मौजूदगी सीधे तौर पर जान जोखिम में डालने वाली है। कुत्ते के घुसते ही वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। तीमारदारों में खौफ का माहौल बन गया और मरीज दहशत में आ गए। यह स्थिति बताती है कि अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था कितनी खोखली हो चुकी है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह घटना सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन है। शीर्ष अदालत कई बार कह चुकी है कि अस्पताल, स्कूल और अन्य संवेदनशील संस्थानों को आवारा पशुओं से पूरी तरह मुक्त रखा जाए। इसके लिए नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी तय की गई है। बावजूद इसके, हैलट जैसे प्रमुख अस्पताल में इस तरह की चूक होना प्रशासनिक सुस्ती और जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।

अस्पताल कर्मचारियों द्वारा कुत्ते को बाहर निकाल देना समस्या का समाधान नहीं है। सवाल यह है कि कुत्ता वार्ड के अंदर तक पहुंचा कैसे? क्या प्रवेश द्वारों पर निगरानी है? क्या सुरक्षा गार्डों की तैनाती पर्याप्त है? क्या अस्पताल परिसर की बाउंड्री और गेट्स सुरक्षित हैं? इन सवालों का जवाब देना अस्पताल प्रशासन और नगर निगम दोनों की जिम्मेदारी है।

यह घटना सिर्फ एक दिन की लापरवाही नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही अव्यवस्था का नतीजा है। हैलट अस्पताल पहले भी साफ-सफाई, सुरक्षा और अव्यवस्थित प्रबंधन को लेकर सवालों में रहा है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में इससे भी गंभीर हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

अब जरूरत है दिखावटी कार्रवाई नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की। अस्पताल परिसर में आवारा पशुओं की एंट्री रोकने के लिए ठोस व्यवस्था, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और नियमित निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए। मरीजों की सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि प्राथमिक जिम्मेदारी है।

हैलट अस्पताल की यह घटना एक चेतावनी है—अगर अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो भरोसे का यह इलाज केंद्र सिर्फ नाम का अस्पताल बनकर रह जाएगा।

Pavan Singh
Pavan Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News