चेतावनी सख्त, संदेश साफ: एक भी बच्चा टीकाकरण से न छूटे
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संवाद 24 संवाददाता। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने आगरा और अलीगढ़ मंडल में टीकाकरण की स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। “एक भी टीका छूटा तो सुरक्षा चक्र टूटा”—इस नारे की जमीनी हकीकत बुधवार को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा में सामने आई, जहां दोनों मंडलों में टीकाकरण की रफ्तार चिंताजनक पाई गई।
मंडलायुक्त सभागार में आयोजित बैठक में अपर मुख्य सचिव के साथ मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गहन समीक्षा की। रिपोर्ट में बच्चों को खसरे के टीके न लगने और निगरानी तंत्र के कमजोर होने की बात उजागर हुई। फिरोजाबाद में हालात सबसे गंभीर मिले, जहां लगभग 70 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ है। इस पर मिशन निदेशक ने सीएमओ को कड़ी फटकार लगाते हुए 10 दिनों में टीकाकरण और 30 दिनों में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की चेतावनी दी।
दोनों मंडलों में खसरे के 1,174 मामले दर्ज होने के बावजूद टीकाकरण में शिथिलता पर नाराजगी जताते हुए डॉ. जोवल ने एएनएम स्तर तक व्यक्तिगत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर बच्चे तक टीका पहुंचे, इसके लिए जवाबदेही तय की जाए और फील्ड में सतत मॉनिटरिंग हो।
स्टाफ असंतुलन पर 15 दिन में एसओपी बैठक में स्वास्थ्य इकाइयों में स्टाफ की कमी और असंतुलन का मुद्दा भी उठा। कहीं जरूरत से ज्यादा फार्मासिस्ट हैं तो कहीं एक भी नहीं। इस विसंगति को दूर करने के लिए 15 दिनों में एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए गए। तैनाती मरीजों की संख्या के अनुरूप करने और आउटसोर्स कर्मियों के प्रबंधन को दुरुस्त करने पर जोर दिया गया।
अस्पतालों को सुधार की 24 घंटे की मोहलत एटा, मैनपुरी, मथुरा और हाथरस के अस्पतालों में सिटीजन चार्टर, सुझाव बॉक्स और स्पष्ट साइनेज लगाने के लिए 24 घंटे की समय-सीमा तय की गई। अनुपालन न होने पर वेतन रोकने और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सफाई कर्मचारी से लेकर सीएमएस तक सभी का लक्ष्य मरीजों को सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण सेवा देना होना चाहिए। सीएमओ को हर माह कम से कम दो आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश भी दिए गए।
सर्वे के बाद समीक्षा बैठक से पहले जिला स्तर पर कराए गए सर्वे में मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और पीएचसी की स्थिति का आकलन किया गया था। अधिकांश लाभार्थियों ने सेवाओं पर संतोष जताया, लेकिन अग्निशमन सुरक्षा, बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण और दवाओं की उपलब्धता में कमियां सामने आईं। इन्हीं बिंदुओं पर त्वरित सुधार के निर्देश जारी किए गए।
कुल मिलाकर, प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दे दिया है—टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं में ढिलाई अब नहीं चलेगी। तय समय-सीमा में सुधार नहीं हुआ तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय है।






