कुशाग्र को इंसाफ मां बोलीं जिस तरह मेरे बेटे की सांसें छीनी गईं, उसी तरह दोषियों को सजा मिले
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संवाद 24 संवाददाता। जिस बेटे को मैंने गोद में खिलाया, वही आज मेरी गोद में हमेशा के लिए सो रहा था। उस दृश्य को याद करती हूं तो आज भी रूह कांप जाती है। यह शब्द हैं उस मां के, जिसने अपने 16 वर्षीय बेटे कुशाग्र को अपहरण और हत्या के जघन्य अपराध में खो दिया। करीब ढाई साल बाद जब अदालत ने दोषियों को दोषी करार दिया, तो सूरत से कानपुर आईं कुशाग्र की मां सोनिया कनोडिया का दर्द शब्दों में छलक पड़ा। उन्होंने कहा कि उन्हें तभी सुकून मिलेगा जब तीनों दोषियों को कठोरतम सजा मिले। “जैसे मेरे बच्चे को मारा गया, वैसी ही सजा इन तीनों को मिलनी चाहिए,” यह कहते हुए उनकी आंखें भर आईं।
यादों से भागने को छोड़ा शहर
सोनिया बताती हैं कि कुशाग्र की यादें उन्हें जीने नहीं दे रही थीं। घर की दीवारें, कानपुर की सड़कें—हर जगह बेटे की तस्वीर दिखती थी। यही वजह रही कि वे अपने परिवार के साथ सूरत शिफ्ट हो गईं।
उन्होंने बताया कि उनका एक 13 वर्षीय बेटा और पांच माह की बच्ची है, जिनकी परवरिश के लिए उन्हें खुद को मजबूत रखना है।
जिसे सहारा दिया, उसी ने छीन लिया सहारा
कुशाग्र की पूर्व ट्यूशन टीचर रचिता वत्स को उन्होंने मदद के इरादे से रखा था। सोनिया ने बताया कि रचिता के माता-पिता की मृत्यु हो चुकी थी। इंसानियत के नाते वे उसके घर खाना लेकर गईं, आर्थिक मदद भी की।
“मुझे क्या पता था कि जिसे मैं सहारा देने जा रही हूं, वही एक दिन मुझसे मेरा सबसे बड़ा सहारा छीन लेगी,” सोनिया की आवाज़ भर्रा उठती है।
पहले भरोसा, फिर साजिश
कोर्ट में दी गई गवाही में सोनिया ने बताया कि घटना से कुछ दिन पहले रचिता अपने कथित प्रेमी प्रभात शुक्ला के साथ घर आई थी। दोनों ने कुशाग्र से कोचिंग आने-जाने का समय और रास्ता पूछ लिया था। मासूम कुशाग्र ने बिना किसी शंका के सारी जानकारी दे दी।
यही जानकारी आगे चलकर उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी साजिश बन गई।
पिता का संयम, आंखों में दर्द
कुशाग्र के पिता मनीष कनोडिया भी फैसले के दिन सूरत से कानपुर पहुंचे। वे पूरे समय खुद को संभाले रहे। उन्होंने कहा,
अगर मैं टूट गया, तो सोनिया को कौन संभालेगा?
हालांकि उनकी आंखों की नमी उनके भीतर के तूफान को साफ बयान कर रही थी।
चाचा की लड़ाई, हर तारीख पर मौजूदगी
इस मुकदमे में कुशाग्र के चाचा सुमित कनोडिया की भूमिका भी अहम रही। लखनऊ में रहने के बावजूद वे हर तारीख पर कानपुर पहुंचे, पैरवी की और परिवार को हर जानकारी देते रहे।
उन्होंने कहा, जिस दिन कुशाग्र का शव देखा था, उसी दिन तय कर लिया था कि दोषियों को चैन से नहीं बैठने दूंगा।
मामले का संक्षेप
30 अक्टूबर 2023 को कुशाग्र कोचिंग के लिए घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। बाद में फिरौती पत्र मिला। जांच में पुलिस पूर्व ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और उनके साथी शिवा गुप्ता तक पहुंची।
पूछताछ के बाद प्रभात के घर से कुशाग्र का शव बरामद हुआ। पुलिस ने तीनों के खिलाफ अपहरण और हत्या की चार्जशीट दाखिल की।
अदालत का फैसला
अपर जिला जज (11) सुभाष सिंह की अदालत ने 14 गवाहों और सबूतों के आधार पर तीनों आरोपियों को अपहरण और हत्या का दोषी करार दिया है। सजा गुरुवार को सुनाई जाएगी।
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ एक परिवार के दर्द की कहानी नहीं, बल्कि भरोसे की हत्या और न्याय की लंबी लड़ाई का प्रतीक है। कुशाग्र को इंसाफ मिला है, लेकिन उसके माता-पिता के दिलों में जो खालीपन है, उसे कोई फैसला कभी नहीं भर सकता।






