गंगाघाट स्टेशन के पास अवैध कब्जों पर चली जेसीबी, 10 पक्के निर्माण जमींदोज रेलवे की जमीन खाली कराने पहुंची टीम
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संवाद 24 संवाददाता। कानपुर के शुक्लागंज स्थित कोतवाली गंगाघाट क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर रेलवे प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गंगाघाट रेलवे स्टेशन के पास रेलवे की जमीन पर बने अवैध कब्जों को हटाना शुरू कर दिया। रेलवे के उच्च अधिकारियों के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में जेसीबी मशीन की मदद से करीब 10 पक्के निर्माण जमींदोज किए गए।
कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवान मौके पर तैनात रहे, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर कब्जाधारकों में भारी नाराजगी देखने को मिली।
बीस साल से रह रहे हैं, अब कहां जाएं
कब्जाधारकों का कहना है कि यह कार्रवाई अनुचित और अन्यायपूर्ण है। उनका दावा है कि वे दो दशक से अधिक समय से यहां रह रहे हैं, उनके पास रहने के अलावा कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। कार्रवाई के दौरान कुछ कब्जेदारों ने प्रशासन से समय देने और पुनर्वास की मांग भी की।
15 दिन पहले चस्पा किया गया था नोटिस
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई। करीब 15 दिन पहले रेलवे लखनऊ मंडल के सीनियर सेक्शन इंजीनियर एस.के. गुप्ता की ओर से अवैध कब्जेदारों को नोटिस चस्पा किया गया था। नोटिस में स्पष्ट रूप से रेलवे की जमीन से कब्जा हटाने के निर्देश दिए गए थे।
नोटिस में दी गई 16 जनवरी तक की मियाद पूरी होने के बाद शुक्रवार को अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।
जेसीबी से हटाए जा रहे हैं कब्जे
आरपीएफ इंस्पेक्टर उन्नाव हरीश कुमार ने बताया कि रेलवे स्टेशन के निकट बने अवैध कब्जों को हटाने के लिए जेसीबी मशीन लगाई गई है। उन्होंने कहा कि करीब 10 अवैध कब्जे चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कार्रवाई पूरी तरह से रेलवे की जमीन को खाली कराने के उद्देश्य से की जा रही है।
भारी पुलिस बल रहा तैनात
कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या न हो, इसके लिए कोतवाली गंगाघाट पुलिस, आरपीएफ और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त अभियान जारी रहेगा, जबकि प्रभावित लोग प्रशासन से पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।






