30 लाख की नौकरी छोड़ी, बिल्ली पालकों के लिए बनाया 100% नेचुरल फूड

संवाद 24 संवाददाता। कभी-कभी एक साधारण सी समस्या असाधारण विचार को जन्म देती है। कानपुर के स्वरूपनगर निवासी कार्तिकेय गुप्ता ने भी ऐसा ही किया। बंगलूरू में 30 लाख रुपये सालाना पैकेज की शानदार नौकरी छोड़कर उन्होंने पालतू बिल्लियों के लिए 100 प्रतिशत नेचुरल और केमिकल-फ्री कैट फूड तैयार किया और अपने स्टार्टअप ‘स्माइलो’ के जरिए लाखों कैट पैरेंट्स की जरूरत को पूरा करने का बीड़ा उठाया।

उनकी मेहनत और सोच को तब राष्ट्रीय पहचान मिली, जब टीवी शो शार्क टैंक इंडिया में स्माइलो को देश के दिग्गज निवेशकों वरुण डुग्गल, कुणाल बहल और अनुपम मित्तल से संयुक्त रूप से निवेश मिला। खास बात यह रही कि निवेशकों ने कार्तिकेय की मांग से अधिक निवेश कर स्टार्टअप पर अपना भरोसा जताया।

पढ़ाई से स्टार्टअप तक का सफर
कार्तिकेय की प्रारंभिक शिक्षा कानपुर के सर पदमपत सिंहानिया एजुकेशन सेंटर से हुई। छात्र जीवन से ही उनमें कुछ अलग करने का जज्बा दिखने लगा था। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2021 में बिट्स पिलानी से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक किया। पढ़ाई पूरी होते ही उन्हें बंगलूरू में एक प्रतिष्ठित कंपनी में 30 लाख रुपये सालाना पैकेज की नौकरी मिली, लेकिन कॉरपोरेट करियर के बीच भी उनके मन में उद्यमिता का सपना पलता रहा।

बंगलूरू में रहते हुए उन्होंने जयपुर निवासी को-फाउंडर अभिषेक अग्रवाल के साथ मिलकर कैट फूड ब्रांड स्माइलो की नींव रखी।

भारत में कैट फूड की कमी ने दिया आइडिया
दोनों संस्थापकों ने महसूस किया कि भारत में पालतू बिल्लियों के लिए सुरक्षित, पौष्टिक और केमिकल-फ्री भोजन के विकल्प बेहद सीमित हैं। इसी खालीपन को भरने के उद्देश्य से स्माइलो को बाजार में उतारा गया। यह पालतू पशु आहार के क्षेत्र में पहला ऐसा प्रयास है, जिसमें 100% नेचुरल कैट फूड पर फोकस किया गया है।

इंटरनेशनल तकनीक, बिना प्रिजरवेटिव 18 महीने तक सुरक्षित
स्माइलो की सबसे बड़ी खासियत इसकी रिटॉर्ट पैकेजिंग टेक्नोलॉजी है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेडी-टू-ईट फूड में इस्तेमाल की जाती है। इस तकनीक में भोजन को मल्टीलेयर पैकेट में भरकर उच्च तापमान और दबाव पर स्टरलाइज किया जाता है, जिससे बैक्टीरिया पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। नतीजा यह कि बिना किसी प्रिजरवेटिव के कैट फूड 18 महीने तक सुरक्षित रहता है और पालतू बिल्लियों के लिए पूरी तरह सेफ होता है।

कीमत ऐसी कि मिडिल क्लास भी खरीद सके
स्माइलो का कैट फूड 70 से 100 रुपये की किफायती रेंज में उपलब्ध है, जिससे यह मिडिल क्लास कैट पैरेंट्स की पहुंच में भी है। गुणवत्ता, सुरक्षा और कीमत—तीनों के संतुलन ने स्माइलो को तेजी से लोकप्रिय बनाया है।

शार्क टैंक से मिली उड़ान
शार्क टैंक इंडिया में कार्तिकेय और अभिषेक की स्पष्ट सोच, मजबूत बिजनेस मॉडल और प्रोडक्ट की गुणवत्ता ने निवेशकों को खासा प्रभावित किया। डील के बाद उत्साहित कार्तिकेय कहते हैं कि उन्हें उम्मीद से कहीं बेहतर निवेश मिला है। उनका सपना है कि स्माइलो को सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में भी एक भरोसेमंद पेट फूड ब्रांड के रूप में स्थापित किया जाए।

कानपुर के एक युवा उद्यमी की यह कहानी न सिर्फ स्टार्टअप की सफलता है, बल्कि उन युवाओं के लिए प्रेरणा भी है जो सुरक्षित नौकरी छोड़कर अपने सपनों को हकीकत में बदलने का साहस रखते हैं।

Pavan Singh
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