उत्तरायणी मेला 2026: बरेली में पहाड़ी संस्कृति का भव्य संगम
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संवाद 24 बरेली। एक ऐसा उत्सव जो सिर्फ मेला नहीं बल्कि लोक संस्कृति, पहाड़ की जीवनशैली और उत्तराखंड के प्रवासियों की जड़ों से जुड़ाव का प्रतीक बन चुका है। उत्तरायणी मेला 2026 इस बार 13, 14 और 15 जनवरी को बरेली क्लब मैदान में आयोजित होगा। यह आयोजन 30वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और पहाड़ी संस्कृति के रंगो से सजा होगा।
मेले का इतिहास और सांस्कृतिक महत्व
उत्तरायणी मेला शुरुआत में 1991 में ‘कौथिक’ कार्यक्रम के रूप में एक छोटे स्तर पर शुरू हुआ, लेकिन वर्षों में यह स्थानीय पर्वतीय समाज और उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का एक प्रमुख उत्सव बन गया है।
यह मेला मूल रूप से मकर संक्रांति के अवसर पर मनाए जाने वाले उत्तरायणी उत्सव से प्रेरित है, जिसे हिमालयी क्षेत्रों में सूर्य की उत्तर की ओर यात्रा के आरंभ के रूप में देखा जाता है, एक नए सौर चरण और जीवन की ऊर्जा का प्रतीक।
बरेली में यह मेला खासकर उन लोगों के लिए मायने रखता है जो उत्तराखंड से बाहर बसे हुए हैं। यह आयोजन उन्हें अपनी संस्कृति, परंपरा, लोकभोजन और पहाड़ी जीवन के अनुभव से जोड़े रखता है।
मेले के मुख्य आकर्षण
रंगयात्रा: मेले का आरंभिष रंगयात्रा से होता है, जिसमें पहाड़ी समाज की झांकियाँ और लोकनृत्य शामिल रहते हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम: युवा कलाकरों के मंच से पारंपरिक गान, छोलिया नृत्य, लोकगीत और पहाड़ी वेशभूषा का जीवंत प्रदर्शन होगा।
हस्तशिल्प एवं व्यंजन: उत्तराखंड के हस्तकला उत्पाद, बांस का अचार, पहाड़ी व्यंजन और स्थानीय स्वाद से युक्त स्टाल मेले की शोभा बढ़ाएंगे।
सामुदायिक अनुभव: यह मेला स्थानीय समुदाय और पर्वतीय समाज के लिए सामाजिक मिलन का भी एक अवसर है — जहां लोग अपने सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं को साझा करते हैं।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
बरेली का उत्तरायणी मेला केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं है; यह स्थानीय व्यापार, पर्यटन और हस्तशिल्प कारीगरों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच भी बन गया है। मेले के दौरान स्टालों और प्रदर्शनी से छोटे व्यवसायों को भी अपनी पहचान बनाने का अवसर मिलता है।
अंततः हम कह सकते हैं कि उत्तरायणी मेला अब बरेली के सांस्कृतिक कैलेंडर का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। यह न सिर्फ पर्वतीय संस्कृति की गरिमा को संवर्धित करता है, बल्कि स्थानीय लोगों और उत्तराखंड से जुड़े समुदाय को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी प्रस्तुत करता है। बरेलीवासियों और आसपास के लोगों के लिए यह उत्सव सामाजिक एकता, सांस्कृतिक सम्मान और लोकजीवन के समृद्ध अनुभव का प्रतीक है, एक ऐसा अनुभव जो हर वर्ष जनवरी के मध्य में संजोया और जिया जाता है।






