‘Rx’ लिखने वालों के हाथों में RDX, वाइट कॉलर आतंकवाद बना खतरे की घंटी: राजनाथ सिंह
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संवाद 24 उदयपुर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश में पढ़े-लिखे लोगों के भटककर समाज और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि आज का सबसे बड़ा खतरा यह है कि उच्च शिक्षा प्राप्त लोग भी आतंक और हिंसा का रास्ता चुन रहे हैं, जो आने वाले समय में देश के लिए बड़ा संकट बन सकता है।
उदयपुर में भूपाल नोबल्स यूनिवर्सिटी के 104वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने 10 नवंबर को लालकिला के पास हुए बम धमाके का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस हमले में शामिल लोग डॉक्टर थे। राजनाथ सिंह ने इसे ‘वाइट कॉलर टेररिज्म’ करार देते हुए कहा कि यह देश के लिए खतरे की घंटी है।
उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि जिन लोगों को अपने पर्चे पर ‘Rx’ लिखना चाहिए, वे आज RDX लेकर घूम रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था केवल पेशेवर सफलता तक ही सीमित क्यों रह गई है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री और नौकरी नहीं, बल्कि नैतिकता, चरित्र और मानवीय मूल्यों का निर्माण भी होना चाहिए।
रक्षा मंत्री ने कहा कि लालकिला विस्फोट की जांच में सामने आया कि यह एक वाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल था। डॉ. उमर-उन-नबी ने आरडीएक्स से भरी कार में विस्फोट किया था। बाद में मुजम्मिल गनाई, अदील राथेर और शाहीना शईद की गिरफ्तारी भी हुई, जो सभी डॉक्टरी पेशे से जुड़े थे। यह दिखाता है कि आतंकवाद अब केवल अशिक्षा से नहीं, बल्कि गलत सोच से जन्म ले रहा है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि ज्ञान से प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, प्रतिस्पर्धा से समृद्धि आती है और समृद्धि से समाज का विकास होता है। लेकिन यदि शिक्षा धर्म के वास्तविक अर्थ, कर्तव्यबोध और नैतिकता को नहीं सिखा पा रही, तो ऐसी शिक्षा समाज के लिए उपयोगी नहीं बल्कि खतरनाक बन जाती है।
धर्म के अर्थ पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म किसी मंदिर, मस्जिद या पूजा स्थल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने का नाम है। नैतिकता और धार्मिक मूल्यों से दूर ले जाने वाली शिक्षा समाज को विनाश की ओर ले जा सकती है। यही कारण है कि कई बार पढ़े-लिखे लोग भी गंभीर अपराधों और आतंकवाद में शामिल हो जाते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह जरूरी नहीं है कि आतंकी निरक्षर हों। उनके पास विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की डिग्रियां भी हो सकती हैं। इसलिए केवल बुद्धिमत्ता नहीं, बल्कि सही दिशा और सही सोच बेहद जरूरी है।
स्वदेशी रक्षा क्षमता पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। डिफेंस सेक्टर में कई स्टार्टअप बेहतर काम कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले 15 से 20 वर्षों में भारत हथियारों के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी देश के विकास को नई गति दे रहा है।






