भारत पहुंचे पुतिन, पीएम मोदी ने तोड़ा प्रोटोकॉल, एयरपोर्ट पर व्यक्तिगत स्वागत
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संवाद 24 संवाददाता। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन देर शाम भारत पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रोटोकॉल तोड़ते हुए स्वयं पालम एयरपोर्ट पहुंचे और विमान से उतरते ही पुतिन का गले लगाकर स्वागत किया। रूसी भाषा में ‘पाजलुस्ता’ (स्वागत है) कहकर पीएम मोदी ने मेहमान का अभिनंदन किया।
दोनों नेताओं की मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीति, रूस–यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में तनाव जैसे मुद्दों पर दुनिया की नजर टिकी हुई है। एजेंडा वैश्विक चुनौतियों, व्यापार, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, रक्षा सौदों और अंतरिक्ष साझेदारी पर केंद्रित होगा।

आज का कार्यक्रम: राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत
- शुक्रवार सुबह राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पुतिन का औपचारिक स्वागत करेंगी।
- इसके बाद पीएम मोदी और पुतिन के बीच हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता होगी।
- भारतीय और रूसी प्रतिनिधिमंडलों के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे।
- शाम को पुतिन महात्मा गांधी स्मारक राजघाट जाकर श्रद्धांजलि देंगे।
- रात में राष्ट्रपति मुर्मू पुतिन के सम्मान में आधिकारिक भोज देंगी।
कई क्षेत्रों में बड़े समझौतों की संभावना
रूस के साथ इस यात्रा में निम्न क्षेत्रों पर अहम समझौते होने की उम्मीद है—
- ऊर्जा और तेल-गैस: रूसी कच्चे तेल और नई ऊर्जा परियोजनाओं पर चर्चा।
- रक्षा उद्योग: संयुक्त उत्पादन, स्पेयर पार्ट्स सप्लाई और निर्यात मॉडल पर नए फैसले।
- अंतरिक्ष सहयोग: ‘गगनयान’ मिशन व चंद्रमा अभियानों में तकनीकी साझेदारी।
- कृषि व व्यापार: आयात-निर्यात को तेज बनाने के लिए नए तंत्र की घोषणा।
पिछले वर्ष पुतिन भारत क्यों नहीं आए थे?
जुलाई 2024 में BRICS शिखर सम्मेलन के समय पुतिन भारत नहीं आए। उस समय इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के वारंट को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा था। रूस ने इसे “अंतरराष्ट्रीय राजनीति का हथकंडा” बताया था। भारत ने तटस्थ रुख बरकरार रखा और अब इस दौरे से संकेत मिला है कि दोनों देश रणनीतिक सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं।
भारत–रूस संबंधों का महत्व
यूक्रेन युद्ध के बावजूद भारत ने रूस के साथ रिश्ते मजबूत रखे। भारत, रूस से सस्ते दाम पर कच्चा तेल खरीद कर अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। रक्षा क्षेत्र में 60% से अधिक उपकरण अभी भी रूस से जुड़े हैं। रणनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, यह यात्रा वैश्विक संतुलन में भारत की अहम भूमिका को मजबूत करेगी।






