सीजफायर के बीच तबाही: लेबनान पर इजरायली हमलों में 254 मौतें, भड़का ईरान – क्या टूटेगा युद्धविराम
Share your love

संवाद 24 नई दिल्ली। मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों को गहरा झटका देते हुए इजरायल ने लेबनान पर ऐसा हमला किया, जिसने पूरे क्षेत्र को फिर से युद्ध की आग में झोंक दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए युद्धविराम (सीजफायर) के कुछ ही घंटों बाद इजरायली वायुसेना ने लेबनान के कई शहरों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 254 लोगों की मौत हो गई और हजारों लोग घायल हो गए। इन हमलों को मौजूदा संघर्ष का सबसे घातक चरण माना जा रहा है, जिसने न सिर्फ लेबनान बल्कि पूरे क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।
सीजफायर के तुरंत बाद हमला, बढ़ा विवाद
जानकारी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी युद्धविराम के बाद उम्मीद थी कि क्षेत्र में हिंसा कम होगी। लेकिन इजरायल ने साफ कर दिया कि यह समझौता लेबनान पर लागू नहीं होता।
इसी के चलते इजरायल ने बेरूत, दक्षिणी लेबनान और बेक्का घाटी में एक साथ 100 से ज्यादा ठिकानों पर बमबारी कर दी। इन हमलों का लक्ष्य हिजबुल्लाह के ठिकानों को बताया गया, लेकिन भारी तबाही रिहायशी इलाकों में भी देखी गई। इस कदम ने सीजफायर की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिहायशी इलाकों में तबाही, अस्पतालों पर भी असर
हमलों का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ा है। कई इलाकों में इमारतें मलबे में बदल गईं और अस्पताल घायलों से भर गए। रेड क्रॉस और संयुक्त राष्ट्र ने इस हमले को “भयावह” और “चौंकाने वाला” बताया है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, एंबुलेंस तक को निशाना बनाया गया, जिससे राहत कार्यों में भी बाधा आई। स्थानीय प्रशासन ने इसे मानवीय संकट करार दिया है, जहां हजारों लोग बेघर हो चुके हैं।
ईरान का गुस्सा, बढ़ सकता है टकराव
इन हमलों के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और संकेत दिया है कि यदि स्थिति नहीं संभली तो वह युद्धविराम से पीछे हट सकता है। ईरान का दावा है कि सीजफायर में लेबनान भी शामिल था, जबकि अमेरिका और इजरायल इसे नकार रहे हैं। यही मतभेद अब बड़े टकराव की वजह बनते दिख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद पूरे मध्य पूर्व को एक बड़े युद्ध की ओर धकेल सकता है।
हिजबुल्लाह की प्रतिक्रिया और बढ़ता खतरा
सीजफायर के बाद जहां हिजबुल्लाह ने कुछ समय के लिए हमले रोके थे, वहीं इजरायली कार्रवाई के बाद उसने फिर से जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं। इससे साफ है कि हालात तेजी से नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं और दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और शांति की अपील
संयुक्त राष्ट्र, फ्रांस, कतर और कई अन्य देशों ने इस हमले की निंदा करते हुए तत्काल हिंसा रोकने की अपील की है। वैश्विक नेताओं का कहना है कि अगर लेबनान को भी सीजफायर में शामिल नहीं किया गया, तो शांति की कोई भी कोशिश असफल हो सकती है।
क्या टूट जाएगा सीजफायर?
मौजूदा हालात को देखते हुए यह सवाल सबसे बड़ा बन गया है कि क्या यह युद्धविराम टिक पाएगा। एक ओर इजरायल अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखने के संकेत दे रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान और उसके सहयोगी इसे समझौते का उल्लंघन मान रहे हैं। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।






