बंगाल में मतदाता सूची पर बड़ा विवाद: क्या 10 लाख नाम हटने से बदल जाएगी चुनावी तस्वीर
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संवाद 24 पश्चिम बंगाल। चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत तैयार की जा रही सप्लीमेंट्री सूची में लाखों नामों पर फैसला होना है, और अब खबर है कि लगभग 10 लाख मतदाताओं के नाम इस सूची से हटाए जा सकते हैं। इस संभावित कदम ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है और कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा राज्य में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए SIR प्रक्रिया चलाई जा रही है। इस प्रक्रिया के तहत पहले ही बड़ी संख्या में नामों की जांच की गई थी और लाखों नामों को ‘अंडर एडजुडिकेशन’ यानी जांच के दायरे में रखा गया था।
लाखों नाम पहले ही जांच के दायरे में
जानकारी के मुताबिक, फरवरी के अंत में जारी अंतिम मतदाता सूची में करीब 60 लाख से अधिक नाम ऐसे थे जिन पर अभी निर्णय होना बाकी था। इन मामलों की सुनवाई के लिए न्यायिक अधिकारियों को लगाया गया है, ताकि हर मामले की निष्पक्ष जांच हो सके। इसी प्रक्रिया के तहत अब पहली सप्लीमेंट्री सूची जारी होने वाली है, जिसमें उन नामों को शामिल या बाहर किया जाएगा जिनकी जांच पूरी हो चुकी है। यही सूची अब विवाद का कारण बन रही है।
10 लाख नाम हटने की आशंका से सियासी हलचल
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि इस पहली सप्लीमेंट्री सूची में लगभग 10 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मुकाबला कड़ा रहता है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, कई जिलों – जैसे मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर – में बड़ी संख्या में नामों पर सवाल उठे हैं। इससे यह आशंका और बढ़ गई है कि मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव हो सकता है।
पहले भी लाखों नाम हट चुके हैं
यह पहली बार नहीं है जब इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की बात सामने आई है। SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही राज्य में बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में बदलाव हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में पहले ही लगभग 60 लाख से अधिक नाम हटाए जा चुके हैं या हटाने की प्रक्रिया में हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को साफ और त्रुटिरहित बनाना है। इसमें मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट नामों को हटाया जाता है।
सुरक्षा और प्रशासन भी अलर्ट पर
सप्लीमेंट्री सूची जारी होने से पहले प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है। कोलकाता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में बैठकें की गईं, जिनमें कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। राज्य सरकार, पुलिस और चुनाव आयोग के अधिकारियों के बीच लगातार समन्वय किया जा रहा है ताकि सूची जारी होने के बाद किसी तरह की अशांति न हो।
चुनाव पर पड़ सकता है बड़ा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची में इस स्तर पर बदलाव चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है। बंगाल में कई सीटें बेहद कम अंतर से तय होती हैं, ऐसे में हजारों या लाखों वोटरों का हटना या जुड़ना निर्णायक साबित हो सकता है। इसी कारण राजनीतिक दल भी बूथ स्तर पर मतदाता सूची की जांच में जुट गए हैं और अपने-अपने समर्थकों के नाम सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे क्या?
अब सबकी नजर पहली सप्लीमेंट्री सूची पर टिकी है। यह सूची न सिर्फ यह तय करेगी कि कितने नाम जोड़े या हटाए गए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगी कि चुनावी मैदान में किसे फायदा और किसे नुकसान हो सकता है। फिलहाल इतना तय है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले मतदाता सूची का यह मुद्दा आने वाले दिनों में और ज्यादा गर्माने वाला है।






