ईरान के ‘ऊर्जा केंद्र’ पर वार: अमेरिका-इज़राइल के हमले से भड़का संकट, दुनिया भर में मची हलचल
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संवाद 24 नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब एक नए और बेहद खतरनाक चरण में पहुंच गया है, जहां अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त रणनीति के तहत ईरान के सबसे अहम ऊर्जा केंद्र पर हमला किया गया। इस हमले ने न केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाया है, बल्कि पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को भी हिला कर रख दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार को ईरान के दक्षिण पार्स (South Pars) गैस फील्ड को निशाना बनाया गया, जो दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार माना जाता है। यह वही क्षेत्र है जो कतर के साथ साझा किया जाता है और ईरान की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है।
क्या हुआ हमले में
इस हमले में गैस फील्ड के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा, जिसमें रिफाइनरी और पाइपलाइन सिस्टम शामिल हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, हमले के बाद वहां आग लग गई और कई जगहों पर उत्पादन रोकना पड़ा। बताया जा रहा है कि यह पहली बार है जब इस युद्ध में सीधे तौर पर ईरान के ऊर्जा सेक्टर को निशाना बनाया गया है। इससे पहले सैन्य ठिकानों पर हमले हो रहे थे, लेकिन अब रणनीति बदलती दिख रही है।
ईरान की तीखी प्रतिक्रिया
हमले के तुरंत बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और खाड़ी क्षेत्र के कई देशों को चेतावनी दी। इसके बाद ईरान ने कतर के रास लाफान गैस केंद्र पर मिसाइल हमला किया, जिससे वहां भी भारी नुकसान हुआ और आग लग गई। ईरान ने साफ कहा है कि अगर उसके ऊर्जा ढांचे पर हमला जारी रहा, तो वह और भी बड़े स्तर पर जवाब देगा। इस घटनाक्रम ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है।
वैश्विक असर: तेल-गैस बाजार में उथल-पुथल
इस हमले का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहा। वैश्विक ऊर्जा बाजार में तुरंत हलचल देखी गई।
कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं
यूरोप में गैस के दामों में उछाल आया
कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ी
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ता है, तो दुनिया भर में ईंधन संकट गहरा सकता है, क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर
इस पूरे घटनाक्रम का एक बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी पड़ा है, जो दुनिया के लगभग 20% तेल परिवहन का रास्ता है। संघर्ष के चलते यहां से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है।
आगे क्या? बढ़ सकता है बड़ा युद्ध
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि “आर्थिक युद्ध” की शुरुआत हो सकता है। ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाना इस बात का संकेत है कि अब यह संघर्ष और व्यापक तथा खतरनाक दिशा में जा सकता है। अगर हालात नहीं संभले, तो मिडिल ईस्ट में एक बड़ा क्षेत्रीय युद्ध छिड़ सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और राजनीति पर पड़ेगा।






