मिडिल ईस्ट में महाविनाश की आहट: रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला, क्या तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है दुनिया

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संवाद 24 नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) इस समय बारूद के ऐसे ढेर पर बैठा है, जहाँ एक छोटी सी चिंगारी भी पूरी दुनिया को महायुद्ध की आग में झोंक सकती है। ताजा घटनाक्रम में, सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाकर किए गए भीषण ड्रोन हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी सीधे संघर्ष के बीच हुए इस हमले ने यह साफ कर दिया है कि अब यह युद्ध केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले चुका है।

दूतावास परिसर में मची अफरा-तफरी
जानकारी के अनुसार, सोमवार देर रात रियाद के पॉश ‘डिप्लोमैटिक क्वार्टर’ में दो आत्मघाती (कामिकेज़) ड्रोनों ने अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया। चश्मदीदों के मुताबिक, एक के बाद एक दो जोरदार धमाकों से पूरा इलाका दहल उठा। धमाके इतने शक्तिशाली थे कि उनकी गूँज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। हमले के तुरंत बाद दूतावास परिसर से काले धुएं का गुबार उठता देखा गया। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इस हमले के कारण दूतावास की इमारत में आग लग गई और संपत्ति को नुकसान पहुँचा है, हालांकि गनीमत यह रही कि इस दौरान किसी के हताहत होने की खबर नहीं है क्योंकि दूतावास कर्मियों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया था।

सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती
सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली (Air Defense System) ने मुस्तैदी दिखाते हुए कई अन्य संदिग्ध प्रोजेक्टाइल और ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, दूतावास के अलावा प्रिंस सुल्तान एयर बेस और रास तनुरा तेल रिफाइनरी के पास भी ‘शत्रुतापूर्ण’ ड्रोनों को इंटरसेप्ट किया गया है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) का एलान कर रखा है और अमेरिकी सेना ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह करने का दावा कर रही है।

युद्ध का बढ़ता दायरा और वैश्विक संकट
मिडिल ईस्ट में तनाव का स्तर अब उस बिंदु पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी का रास्ता कठिन नजर आता है। ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने के लिए खाड़ी के उन तमाम देशों को चेतावनी दी है जहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। कुवैत, कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भी लगातार धमाकों की खबरें आ रही हैं। इस युद्ध का सबसे खतरनाक असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जो दुनिया के तेल व्यापार की जीवनरेखा है, वह अब लगभग बंद होने की कगार पर है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे भारत सहित पूरी दुनिया में महंगाई का खतरा मंडराने लगा है। एयर इंडिया और इंडिगो समेत कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने खाड़ी देशों के लिए अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं, जिससे हजारों यात्री बीच मझधार में फंस गए हैं।

क्या अमेरिका ईरान में जमीन पर उतरेगा?
अमेरिकी प्रशासन का रुख अब और भी सख्त हो गया है। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका का लक्ष्य केवल जवाबी हमला करना नहीं, बल्कि ईरान के मिसाइल उत्पादन और नौसैनिक बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट करना है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान 4 से 5 सप्ताह तक चल सकता है और जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सैनिकों को सीधे ईरानी जमीन पर उतारा जा सकता है।

भारत के लिए बढ़ी चिंता
इस तनावपूर्ण स्थिति ने भारत की भी चिंता बढ़ा दी है। खाड़ी देशों में लाखों भारतीय कार्यरत हैं जिनकी सुरक्षा अब दांव पर है। साथ ही, तेल आपूर्ति बाधित होने से भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। विदेश मंत्रालय स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और नागरिकों को इन क्षेत्रों की यात्रा न करने की सलाह दी गई है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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