मध्य पूर्व में जंग की दस्तक: अमेरिका-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई से दहला तेहरान, ईरान ने किया पलटवार
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संवाद 24 नई दिल्ली । आज यानी 28 फरवरी 2026 को मध्य पूर्व का माहौल पूरी तरह बदल गया है, जब संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ एक बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया। इस हमले को जॉइंट ऑपरेशन कहा जा रहा है जिसमें दोनों देशों की वायुसेना और मिसाइल क्षमताओं का उपयोग किया गया है – और यह कदम ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल ढांचे पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है। विशेष रूप से जानकारों के अनुसार, यह कार्रवाई “प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक” के नाम से की गई – यानी पहले से योजना बनाई गई हमला -जिसका मकसद ईरान को आगे का कदम उठाने से पहले ही हतोत्साहित करना था। तेहरान की आसमान में अचानक धमाकों की आवाजें गूँजीं और तेज धुएँ के बादल शहर के कई हिस्सों में उभरते दिखे।
क्यों हुआ यह हमला?
पिछले कुछ महीनों से ईरान और अमेरिका/इजरायल के बीच परमाणु वार्ता चल रही थी, जिनका लक्ष्य था ईरान के संवेदनशील परमाणु प्रोग्राम को सीमित करना और क्षेत्र में स्थिरता लाना। लेकिन बातचीत के बीच अचानक यह सैनिक कार्रवाई शुरू हो गई, जिससे वार्ता की प्रक्रिया पर बड़ा सवालचिन्ह लग गया। ईरानी मंत्रालय ने इस हमले को “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बताया है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अमेरिकी राष्ट्रपति और इजरायली नेतृत्व का कहना है कि यह कदम उन सुरक्षा खतरों को खत्म करने के लिए जरूरी था, जो ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और संभावित परमाणु हथियारों से उत्पन्न हो रहे थे। व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया है कि इस अभियान का लक्ष्य सैन्य ढांचे को कमजोर करना है, न कि आम जनता को निशाना बनाना।
ईरान का पलटवार
हमले के तुरंत बाद ईरान ने भी प्रतिक्रिया दी – उसने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागीं। तेहरान, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इराक़ और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों सहित कई क्षेत्रों में ईरानी मिसाइलों के हमले दर्ज किए गए हैं। राजधानी तेहरान में धमाके और मिसाइल हमलों के बाद भय और अफ़रातफ़री का माहौल बन गया। लोग घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागते दिखे, वहीं सड़कों पर लोगों को नकदी निकालते हुए देखा गया। कई शहरों में स्कूलों और विश्वविद्यालयों को बंद कर दिया गया, और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया।
मानवीय और राजनीतिक प्रभाव
सबसे चिंताजनक खबर यह है कि एक स्ट्राइक में एक प्राथमिक विद्यालय भी निशाने पर आया, जिससे दर्जनों बच्चों की मौत हो गई। ईरानी अधिकारियों ने इस हमले को “निष्पाप बच्चों पर हमला” बताया और कड़ा शब्दों में इसकी निंदा की है। इस हरकत के बाद कई देशों ने अपनी प्रतिक्रियाएँ दी हैं। रूस ने इस संयुक्त हमले को “बिना किसी उकसावे का सशस्त्र आक्रमण” बताया और अमेरिका एवं इजरायल की कड़ी आलोचना की है। वहीं कई यूरोपीय नेताओं ने दोनों पक्षों से युद्ध को तत्काल रोकने और फिर से वार्ता की मेज पर लौटने की अपील की है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भारत की स्थिति
भारत ने भी अपने नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की है, खासकर उन भारतीयों के लिए जो ईरान और इजरायल में रह रहे हैं। अधिकारियों ने कहा है कि सभी लोग अत्यंत सतर्क रहें और स्थानीय दिशा-निर्देशों का पालन करें। कुछ देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तत्काल बैठक बुलाने का सुझाव दिया है, ताकि क्षेत्र में बढ़ते तनाव और मानवीय संकट को कम किया जा सके।
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष सिर्फ एक सैन्य मुठभेड़ नहीं रह गया है, बल्कि यह एक व्यापक भू-राजनीतिक मुद्दा बन सकता है जो पूरे मध्य पूर्व को प्रभावित करेगा। फिलहाल, कोई स्पष्ट संकेत नहीं है कि कब तक यह लड़ाई रुकेगी या शांति की प्रक्रिया दोबारा शुरू होगी – लेकिन एक बात तो तय है कि दुनिया की नजरें अब इसी क्षेत्र पर टँकी हुई हैं।






