शांति के वैश्विक दूत: इजरायल और फिलिस्तीन दोनों का सर्वोच्च सम्मान पाने वाले दुनिया के विरले नेता बने पीएम मोदी
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संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति के इतिहास में आज एक ऐसा अध्याय लिखा गया है जिसने भारत के बढ़ते प्रभाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तटस्थ व संतुलित विदेश नीति को पूरी दुनिया के सामने सिद्ध कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के उन गिने-चुने नेताओं की श्रेणी में शामिल हो गए हैं, जिन्हें इजरायल और फिलिस्तीन, दोनों परस्पर विरोधी देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा है। यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री के लिए गौरवपूर्ण है, बल्कि यह भारत की उस ‘डी-हाइफनेशन’ नीति की जीत है, जिसमें हम दोनों पक्षों के साथ समान और स्वतंत्र संबंध बनाए रखने में सफल रहे हैं।
इजरायल की संसद में ऐतिहासिक सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी इस समय इजरायल के दो दिवसीय दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान उन्हें इजरायल की संसद ‘नेसेट’ में ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया। यह नेसेट का सर्वोच्च सम्मान है, जो केवल उन वैश्विक हस्तियों को दिया जाता है जिन्होंने इजरायल के साथ संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक शांति के लिए असाधारण कार्य किया हो। इस अवसर पर इजरायली नेताओं ने पीएम मोदी को ‘इजरायल का सच्चा मित्र’ बताते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की। यह सम्मान भारत और इजरायल के बीच पनप रही नई रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है, जो रक्षा, तकनीक और कृषि जैसे क्षेत्रों में मील का पत्थर साबित हो रही है।
फिलिस्तीन का ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट’
प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की विशिष्टता यह है कि वे इजरायल के करीब होने के बावजूद फिलिस्तीन के साथ भारत के पुराने और भावनात्मक संबंधों को कम नहीं होने देते। इससे पहले, फिलिस्तीन ने भी प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट’ से सम्मानित किया था। यह सम्मान किसी विदेशी नेता को दिया जाने वाला फिलिस्तीन का सबसे बड़ा अवार्ड है। यह इस बात की तस्दीक करता है कि अरब जगत में प्रधानमंत्री मोदी की छवि एक भरोसेमंद और न्यायप्रिय नेता की है। बहुत कम ऐसे वैश्विक नेता हैं जो इन दोनों धुर विरोधी राष्ट्रों के बीच इतनी सहजता और सम्मान के साथ स्वीकार्य हैं।
संतुलन और ‘डी-हाइफनेशन’ की नीति
भारतीय विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी ने पारंपरिक लीक से हटकर एक नई राह चुनी है। पहले भारत के संबंधों को ‘इजरायल बनाम फिलिस्तीन’ के चश्मे से देखा जाता था, लेकिन मोदी सरकार ने इसे ‘इजरायल और फिलिस्तीन’ में बदल दिया। उन्होंने साबित किया कि भारत इजरायल के साथ सुरक्षा और विकास के क्षेत्र में हाथ मिला सकता है, और साथ ही फिलिस्तीन के मानवीय अधिकारों और संप्रभुता का पुरजोर समर्थन भी कर सकता है। इसी संतुलन का नतीजा है कि आज दोनों पक्ष भारत की ओर उम्मीद की नजरों से देखते हैं।
वैश्विक शांति दूत के रूप में उभरता भारत
यरूशलम में मिले इस सम्मान ने भारत को मध्य-पूर्व के संकटों में एक संभावित मध्यस्थ (Mediator) के रूप में भी स्थापित किया है। जब दुनिया खेमों में बंटी हुई है, तब पीएम मोदी का दोनों तरफ से सम्मानित होना यह दर्शाता है कि भारत की आवाज़ आज दुनिया में सबसे विश्वसनीय मानी जा रही है। इजरायली संसद में प्रधानमंत्री का संबोधन केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने पूरी दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के वैश्विक मंत्र को अपनाने का संदेश दिया।
सम्मानों की लंबी फेहरिस्त और बढ़ता कद
प्रधानमंत्री मोदी के नाम अब तक दर्जनों अंतरराष्ट्रीय सर्वोच्च नागरिक सम्मान हो चुके हैं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), रूस, भूटान, और हाल ही में इजरायल द्वारा दिया गया यह सम्मान उनके बढ़ते वैश्विक कद की गवाही देता है। यह भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का उदय है, जहाँ देश की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और मजबूत नेतृत्व के कारण दुनिया के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली राष्ट्र भारत को अपना स्वाभाविक साथी मान रहे हैं।
भविष्य की कूटनीति के लिए एक मिसाल
यह घटनाक्रम आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेगा। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा न केवल व्यापारिक समझौतों के लिए याद रखा जाएगा, बल्कि एक ऐसी मिसाल के रूप में भी जाना जाएगा जहाँ एक राष्ट्र प्रमुख ने अपनी कूटनीतिक कुशलता से दो विवादित पक्षों के बीच अपनी विश्वसनीयता बनाए रखी।






