अमेरिकी टैरिफ युद्ध और बैंकों के विलय पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बड़ा बयान, क्या बदलेगी भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर?
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संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक मंच पर अमेरिका द्वारा उठाए गए टैरिफ संबंधी कदमों और घरेलू स्तर पर बैंकिंग सुधारों को लेकर जारी चर्चाओं के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत का रुख स्पष्ट किया है। सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के केंद्रीय बोर्ड को संबोधित करने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक चुनौतियों, भविष्य के बैंकिंग रोडमैप और भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों की मजबूती पर विस्तार से चर्चा की।
अमेरिकी टैरिफ विवाद: ‘अभी कुछ कहना जल्दबाजी’
हाल ही में अमेरिका में टैरिफ को लेकर मचे घमासान और वहां की सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 15% वैश्विक टैरिफ की घोषणा ने पूरी दुनिया में हलचल पैदा कर दी है। इस पर टिप्पणी करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अमेरिका द्वारा घोषित इन टैरिफ परिवर्तनों और उनके संभावित प्रभावों पर अभी कोई भी अंतिम टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि भारत का वाणिज्य मंत्रालय इस पूरी स्थिति की सूक्ष्मता से समीक्षा कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल इन बदलावों का बारीकी से अध्ययन करेगा, जिसके बाद ही आगे की वार्ताओं और रणनीतिक निर्णयों पर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा। भारत की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी वैश्विक नीतिगत बदलाव का भारतीय निर्यातकों और घरेलू अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
बैंकों के विलय पर क्या है सरकार की योजना?
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के विलय को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि फिलहाल सरकार के पास इसके लिए कोई नया रोडमैप तैयार नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं किसी रोडमैप से परिचित नहीं हूं… ऐसा कोई रोडमैप अस्तित्व में नहीं है।” हालांकि, उन्होंने एक महत्वपूर्ण भविष्यगामी संकेत भी दिया। सीतारमण ने बताया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ‘बैंकिंग के लिए उच्च स्तरीय समिति’ (High-Level Committee on Banking for Viksit Bharat) प्रस्तावित की गई है। यह समिति एक बार नियुक्त होने के बाद बैंकिंग क्षेत्र के हर पहलू पर गौर करेगी, जिसमें बैंकों को मजबूत बनाना और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से बड़े ऋणदाता (Mega-lenders) तैयार करना शामिल है।
भारत-अमेरिका डील: अनिश्चितताओं के बीच भी रास्ता साफ
वैश्विक स्तर पर छाई आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया कि भारत का मार्ग व्यापारिक समझौतों को लेकर बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने बताया कि भारत ने हाल के दिनों में ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (EU) जैसे प्रमुख देशों और क्षेत्रों के साथ सफल व्यापारिक समझौते किए हैं। अमेरिका के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि भारत एक स्पष्ट मार्ग पर चल रहा है और स्थिति की समीक्षा के बाद आगे की बातचीत को गति दी जाएगी।
बैंकों को कड़ी चेतावनी: मिस-सेलिंग पर भड़कीं मंत्री
इसी कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री ने बैंकों की कार्यप्रणाली पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने बैंकों द्वारा ग्राहकों को कोर बैंकिंग सेवाओं के बजाय जबरन या गलत तरीके से बीमा उत्पाद बेचने (Misselling of Insurance Products) की शिकायतों पर नाराजगी जताई। उन्होंने बैंकों को अपने मुख्य व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करने और ग्राहकों के भरोसे को प्राथमिकता देने की सख्त हिदायत दी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इन बयानों से यह साफ है कि भारत सरकार वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों को लेकर सतर्क है, लेकिन साथ ही वह घरेलू आर्थिक सुधारों को एक सोची-समझी रणनीति के तहत आगे बढ़ाना चाहती है। चाहे वह अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंध हों या बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती, केंद्र सरकार ‘विकसित भारत’ के विजन को ध्यान में रखकर हर कदम उठा रही है।






