नाइजीरिया के ग्रामीण इलाकों में सामूहिक नरसंहार, 200 से अधिक नागरिकों की मौत

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संवाद 24 नई दिल्ली। पश्चिमी नाइजीरिया के क्वारा राज्य के दो छोटे-छोटे गांवों वोरो और नुकू में आतंकियों के coordinated हमले ने स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया है, जिसमें कम से 162 से 200 से अधिक लोगों की मौत हुई है, यह देश में इस वर्ष का सबसे घातक हमला माना जा रहा है। स्थानीय सांसदों और सुरक्षा स्रोतों के मुताबिक, हमलावरों ने शाम के समय अचानक गांवों पर धावा बोला और ग्रामीणों को पकड़कर निशाना बनाया। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि वे लोगों को पहले इकट्ठा कर के उनके हाथ बाँधते हुए फायरिंग की गई, घर, दुकानें और समुदाय के राजा का महल तक आग के हवाले कर दिया गया।

हमले के पीछे कौन? आतंकी समूह की पहचान
स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इस नरसंहार के पीछे वह सशस्त्र समूह लाकुरावा (Lakurawa) है, जिसका सम्बन्ध ISIS-प्रेरित ढांचे से बताया जा रहा है। पहले भी वे आसपास के इलाकों में धार्मिक कट्टरता फैलाने की कोशिश कर चुके थे और उन्होंने लोगों से शरिया कानून अपनाने की मांग की थी। जब निवासियों ने यह मांग ठुकराई, तो यही समूह पीछे लौट कर हमला कर बैठा। रेड क्रॉस के बयान में कहा गया है कि हमले के दौरान कई लोग गायब होने के बाद जंगल की ओर भाग गए, जिनकी अभी भी खोज जारी है। कुछ शवों को बलि के रूप में दफनाया गया है, जबकि कई घर और दुकानें जला दी गईं।

क्षेत्र की दूरदराज स्थिति से सहायता में देरी
क्वारा राज्य की राजधानी से लगभग आठ घंटे की दूरी पर स्थित ये गांव बेहद दूरदराज और सीमा-सटे इलाके में हैं, जहाँ तक सड़क और संचार प्रणाली बेहद कमजोर है। इसी वजह से राहत कार्यों में कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही हैं और बचाव-मिशन पर असर पड़ रहा है।

किंतु यही एक ही हमला नहीं
विश्लेषकों के अनुसार, नाइजीरिया में यह घटना अकेली नहीं है। उत्तरी और मध्य हिस्सों के गांवों में समय-समय पर ऐसे आतंकवादी/बंदूकधारी हमले होते रहे हैं, जिसमें ग्रामीणों, किसानों और स्थानीय समुदायों को निशाना बनाया गया है। पिछले वर्ष भी इसी तरह के हमले में दर्जनों लोगों की जानें गई थी और कई नागरिक अपने घरों से मजबूरन पलायन करने पर मजबूर हुए थे।

स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया और सुरक्षा कदम
क्वारा राज्य के अधिकारियों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और सरकार की ओर से कहा गया है कि यह हमला हाल के सुरक्षा अभियानों के जवाब में हुआ लग रहा है, क्योंकि सेना और सुरक्षा बल उग्रवादी समूहों के खिलाफ लगातार कार्यवाहियाँ कर रहे हैं। इसके साथ ही नाइजीरियाई राष्ट्रपति ने सेना को “ऑपरेशन सवाना शील्ड (Savanna Shield)” नाम के अभियान को और मजबूत करने का आदेश दिया है, जिसमें अतिरिक्त यूनिटों को तैनात किया जा रहा है ताकि ऐसे हिंसक कृत्यों को रोका जा सके और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा और चेतावनी
हमले की भयावहता के कारण आसपास के अन्य गांवों में भी लोग भयभीत हैं। कई ने अपने घरों को छोड़ कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की कोशिश की है। सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि विदेशी और घरेलू सुरक्षा सहयोग, साथ ही स्थानीय प्रशासन को संयोजन में काम करना होगा, ताकि ऐसे अत्याचारों को रोका जा सके और नागरिकों की सुरक्षा पर अधिक ध्यान दिया जा सके।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता
यह घटना नाइजीरिया में जारी सुरक्षा संकट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर से उजागर करती है। विदेशों में बसे मानवीय और सुरक्षा संगठन भी नाइजीरियाई सरकार से अपील कर रहे हैं कि वे इस प्रकार की उग्रवादी हिंसा को रोकने के लिए ठोस रणनीति अपनाएँ और नागरिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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