महाराष्ट्र की राजनीति में नया इतिहास: सुनेत्रा पवार बनीं राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री
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संवाद 24 महाराष्ट्र। सियासत में आज एक ऐसा अध्याय लिखा गया जिसने न केवल राज्य के प्रशासनिक ढांचे को एक नया चेहरा दिया, बल्कि पवार परिवार के भीतर चल रहे शक्ति संतुलन को भी नई दिशा प्रदान की है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दिग्गज नेता स्वर्गीय अजीत पवार की पत्नी, सुनेत्रा पवार ने शनिवार को महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राजभवन के ‘लोक भवन’ में आयोजित एक गरिमामय लेकिन सादगी भरे समारोह में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
विरासत को संभालने की चुनौती: अजीत पवार के निधन के बाद का घटनाक्रम
यह घटनाक्रम महज एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं है, बल्कि एक गहरी भावनात्मक और कूटनीतिक कहानी का हिस्सा है। दरअसल, यह पद पिछले बुधवार को एक दुखद विमान हादसे में अजीत पवार के असामयिक निधन के बाद से खाली पड़ा था। अजीत पवार के जाने से न केवल पार्टी में बल्कि महायुति सरकार में भी एक बड़ा शून्य पैदा हो गया था। इस शून्य को भरने के लिए एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं—प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल—ने सर्वसम्मति से सुनेत्रा पवार के नाम पर मुहर लगाई।
भावुक क्षण: ‘अजीत दादा’ के संकल्पों को आगे बढ़ाने का वादा
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान माहौल काफी भावुक था। जब सुनेत्रा पवार मंच की ओर बढ़ीं, तो राजभवन परिसर ‘अजीत दादा अमर रहे’ के नारों से गूंज उठा। सफेद साड़ी पहने सुनेत्रा पवार के चेहरे पर दुख और जिम्मेदारी का मिला-जुला भाव था। उन्होंने शपथ लेने के बाद अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि वह अपने पति के सपनों को पूरा करने और उनके द्वारा शुरू किए गए विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने विशेष रूप से किसानों, महिलाओं और युवाओं के कल्याण के लिए काम करने का संकल्प दोहराया।
शरद पवार की गैरमौजूदगी: परिवार और राजनीति के बीच बढ़ती दूरियां
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा एनसीपी के संस्थापक और भीष्म पितामह शरद पवार की रही। जहां एक तरफ मुंबई में नई उपमुख्यमंत्री का राज्याभिषेक हो रहा था, वहीं दूसरी तरफ शरद पवार ने बारामती में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सबको चौंका दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें इस शपथ ग्रहण के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं थी और उन्होंने केवल मीडिया के माध्यम से ही इस खबर को जाना।
विलय का दावा: शरद पवार ने छेड़ी नई राजनीतिक बहस
शरद पवार ने एक और बड़ा ‘बम’ फोड़ते हुए दावा किया कि अजीत पवार के निधन से पहले दोनों गुटों (एनसीपी और एनसीपी-एसपी) के विलय की बात चल रही थी। उन्होंने कहा कि 12 फरवरी को पार्टी के एक होने की संभावना थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। शरद पवार की इस दूरी ने राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा छेड़ दी है कि क्या पवार परिवार के भीतर की दरार अभी भी बरकरार है या यह भविष्य के किसी नए राजनीतिक गठबंधन की ओर इशारा है।
महिला सशक्तिकरण का नया चेहरा: महाराष्ट्र का पहला महिला नेतृत्व
महाराष्ट्र के गठन के बाद से आज तक किसी महिला ने उपमुख्यमंत्री का पद नहीं संभाला था। सुनेत्रा पवार ने इस पद पर आसीन होकर इतिहास रच दिया है। हालांकि, वह फिलहाल राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन की सदस्य नहीं हैं, लेकिन नियमों के मुताबिक उन्हें छह महीने के भीतर चुनाव जीतकर आना होगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह अपने पति की पारंपरिक सीट ‘बारामती’ से उपचुनाव लड़ सकती हैं।
सत्ता का समीकरण: महायुति का साथ और विभागों का बंटवारा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में हुए इस समारोह ने यह साफ कर दिया कि भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) इस कठिन समय में अजीत पवार के गुट के साथ मजबूती से खड़े हैं। सुनेत्रा पवार को उन सभी विभागों की जिम्मेदारी दी गई है जो अजीत पवार के पास थे, सिवाय वित्त मंत्रालय के। सूत्रों के अनुसार, वित्त विभाग अब मुख्यमंत्री फडणवीस स्वयं संभाल सकते हैं।
अग्निपरीक्षा की तैयारी: ‘वहिनी’ से राजनेता तक का सफर
सुनेत्रा पवार, जिन्हें अब तक केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता और ‘बारामती की वहिनी’ के रूप में जाना जाता था, अब एक पूर्णकालिक राजनेता के रूप में अग्निपरीक्षा से गुजरेंगी। उनके सामने न केवल अपने पति की विरासत को बचाए रखने की चुनौती है, बल्कि आगामी चुनावों में पार्टी को एकजुट रखने और शरद पवार जैसे अनुभवी खिलाड़ी के सामने अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की भी जिम्मेदारी है। महाराष्ट्र की जनता अब यह देख रही है कि क्या ‘सुनेत्रा युग’ राज्य की राजनीति में वही धमक पैदा कर पाएगा जो ‘अजीत दादा’ के समय में हुआ करती थी।






