राफेल डील निर्णायक मोड़ पर: भारत-फ्रांस के बीच 114 फाइटर जेट पर सहमति के संकेत, ‘मेक इन इंडिया’ को बड़ी मजबूती
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत और फ्रांस के बीच बहुप्रतीक्षित लड़ाकू विमान सौदा अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिख रहा है। भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन क्षमता को देखते हुए सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के तहत राफेल लड़ाकू विमानों की बड़ी खरीद पर गंभीर बातचीत चल रही है। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्तावित डील में भारतीय वायुसेना को कम से कम 114 आधुनिक फाइटर जेट मिल सकते हैं।
इस सौदे को फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron के प्रस्तावित भारत दौरे से पहले ठोस रूप मिलने की संभावना जताई जा रही है, जिससे भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम मिल सकता है।
भारतीय वायुसेना की जरूरत, सरकार की प्राथमिकता
भारतीय वायुसेना लंबे समय से फाइटर स्क्वाड्रनों की कमी से जूझ रही है। मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य और दो-मोर्चा चुनौतियों के बीच राफेल जैसे मल्टी-रोल लड़ाकू विमान वायुसेना की परिचालन क्षमता को निर्णायक बढ़त दे सकते हैं। इसी को देखते हुए वायुसेना ने बड़ी संख्या में राफेल विमानों की खरीद का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा है।
मंजूरी की प्रक्रिया
सूत्रों के मुताबिक, इस डील को आगे बढ़ाने के लिए पहले रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की औपचारिक मंजूरी जरूरी होगी। इसके बाद कीमतों और शर्तों पर बातचीत होगी, और अंततः कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से अंतिम स्वीकृति ली जाएगी। साथ ही, वार्षिक रक्षा बजट में इसके लिए पर्याप्त वित्तीय प्रावधान भी करना होगा।
अरबों यूरो की डील
पिछले वर्ष भारत ने नौसेना के लिए 24 राफेल (मरीन वर्जन) विमानों के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। उसी के आधार पर वायुसेना के लिए प्रस्तावित यह डील लगभग 10 अरब यूरो के आसपास आंकी जा रही है, हालांकि अंतिम आंकड़ा बातचीत के बाद तय होगा।
भारत में होगा निर्माण
इस सौदे की सबसे अहम विशेषता यह है कि राफेल विमानों का बड़ा हिस्सा भारत में निर्मित होगा। जून 2025 में Tata Advanced Systems Limited (TASL) और Dassault Aviation के बीच भारत में राफेल के फ्यूजलेज निर्माण को लेकर समझौता हुआ था।
TASL हैदराबाद में एक अत्याधुनिक निर्माण सुविधा स्थापित कर रही है, जहां राफेल फ्यूजलेज के चार प्रमुख हिस्सों का निर्माण किया जाएगा। यह इकाई न केवल भारतीय वायुसेना, बल्कि डसॉल्ट के वैश्विक ऑर्डरों की आपूर्ति भी करेगी। योजना के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2028 तक उत्पादन शुरू होने और सालाना 24 फ्यूजलेज बनाने की क्षमता विकसित की जाएगी।
60% तक स्वदेशी मूल्य
सूत्रों के अनुसार, हैदराबाद में प्रस्तावित इंजन निर्माण संयंत्र और उत्तर प्रदेश के जेवर में बन रहे मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) हब को मिलाकर राफेल कार्यक्रम का करीब 60% मूल्य भारत में ही सृजित हो सकता है। यह ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
रणनीतिक और औद्योगिक असर
यदि यह डील अंतिम रूप लेती है, तो इससे न केवल भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा होगा, बल्कि भारत के एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग में यह समझौता अब तक का सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।






