
संवाद 24 डेस्क। भारत की ओलंपिक मेजबानी की महत्वाकांक्षा को अंतरराष्ट्रीय खेल जगत से लगातार सकारात्मक संकेत मिलते नजर आ रहे हैं। अब इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) के मुख्य कार्यकारी रिचर्ड गाउल्ड ने भारत की भविष्य में ओलंपिक की मेजबानी की दावेदारी के समर्थन की बात कही है। क्रिकेट की दुनिया में प्रभाव रखने वाले इंग्लैंड की ओर से आया यह संकेत भारत के लिए खेल कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत के सपने को मिला ब्रिटेन का ग्रीन सिग्नल!
भारत लंबे समय से दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजनों में से एक ओलंपिक की मेजबानी की दिशा में अपनी संभावनाएं तलाश रहा है। ऐसे में ECB की ओर से समर्थन का संकेत मिलना इस अभियान के लिए उत्साह बढ़ाने वाला है। रिचर्ड गाउल्ड का रुख बताता है कि भारत की खेल आयोजन क्षमता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक सोच मौजूद है। भारत पहले ही कई बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी कर अपनी क्षमता दिखा चुका है। क्रिकेट विश्व कप जैसे विशाल टूर्नामेंट से लेकर एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों तक, देश बड़े पैमाने पर प्रतियोगिताएं आयोजित करने का अनुभव हासिल कर चुका है।
क्रिकेट की वजह से और खास हो गया मामला
ECB का समर्थन इसलिए भी अहम है क्योंकि क्रिकेट अब ओलंपिक के मंच पर दोबारा दस्तक दे चुका है। लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक में पुरुष और महिला क्रिकेट को शामिल किया गया है। क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल करने से इस खेल को उन देशों और दर्शकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा, जहां अभी इसकी लोकप्रियता सीमित है। भारत क्रिकेट का सबसे बड़ा बाजार होने के साथ-साथ इस खेल के सबसे बड़े दर्शक आधार वाले देशों में शामिल है। इसलिए भारत में भविष्य में ओलंपिक आयोजित होने की स्थिति में क्रिकेट की भूमिका और दर्शकों की दिलचस्पी दोनों बेहद महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
ECB के समर्थन से भारत को क्या फायदा?
ओलंपिक की मेजबानी केवल स्टेडियम तैयार करने का मामला नहीं है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों, खिलाड़ियों, प्रसारकों, प्रायोजकों और विभिन्न देशों का भरोसा हासिल करना भी जरूरी होता है। ऐसे में इंग्लैंड जैसे प्रमुख क्रिकेट राष्ट्र से समर्थन का सकारात्मक संदेश भारत की दावेदारी के लिए उपयोगी हो सकता है। खेलों की दुनिया में किसी बड़े आयोजन की मेजबानी को लेकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन देश की विश्वसनीयता को मजबूत करता है। ECB की टिप्पणी इसी नजरिए से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत के पास पहले से है बड़े आयोजनों का अनुभव
भारत ने पिछले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए अपने बुनियादी ढांचे को काफी विस्तार दिया है। बड़े स्टेडियम, आधुनिक हवाई अड्डे, होटल, मेट्रो नेटवर्क, सड़क कनेक्टिविटी और डिजिटल सुविधाओं के विस्तार ने देश की आयोजन क्षमता को मजबूत किया है। हालांकि ओलंपिक का स्तर किसी भी अन्य खेल आयोजन से कहीं बड़ा होता है। इसमें एक साथ कई खेलों के लिए प्रतियोगिता स्थल, खिलाड़ियों के रहने की व्यवस्था, परिवहन, सुरक्षा, मेडिकल सेवाएं और अत्याधुनिक तकनीकी ढांचा तैयार करना पड़ता है।
असली चुनौती सिर्फ मेजबानी हासिल करना नहीं!
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह अपनी दावेदारी को केवल लोकप्रियता या क्रिकेट के दम पर नहीं, बल्कि हर खेल के लिए मजबूत बुनियादी ढांचे और लंबी अवधि की योजना के आधार पर पेश करे।ओलंपिक में क्रिकेट के अलावा एथलेटिक्स, तैराकी, हॉकी, बैडमिंटन, कुश्ती, शूटिंग, बॉक्सिंग और कई अन्य खेल शामिल होते हैं। इसलिए संभावित मेजबान देश को पूरे खेल तंत्र को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में काम करना पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय खेल कूटनीति में बढ़ेगा भारत का कद?
भारत की ओलंपिक महत्वाकांक्षा को मिलने वाला अंतरराष्ट्रीय समर्थन केवल एक आयोजन से जुड़ा विषय नहीं है। यह वैश्विक खेल व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका का संकेत भी माना जा सकता है। क्रिकेट की वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका पहले से बेहद प्रभावशाली है। ऐसे में यदि क्रिकेट जगत के दूसरे बड़े देश भी भारत की खेल संबंधी महत्वाकांक्षाओं के प्रति सकारात्मक रुख अपनाते हैं, तो इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय खेल कूटनीति को और मजबूती मिल सकती है।
ओलंपिक में क्रिकेट की वापसी ने बदल दिया खेल
क्रिकेट को 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में शामिल किया जाना इस खेल के लिए ऐतिहासिक बदलाव है। क्रिकेट 1900 के बाद पहली बार ओलंपिक कार्यक्रम में लौट रहा है और 2028 में पुरुष तथा महिला दोनों प्रतियोगिताएं होंगी। ECB ने भी क्रिकेट की ओलंपिक वापसी को वैश्विक मंच पर खेल के विस्तार का बड़ा अवसर बताया था। यही वजह है कि भारत की ओलंपिक दावेदारी और क्रिकेट का रिश्ता आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर भारत भविष्य में ओलंपिक की मेजबानी हासिल करता है, तो क्रिकेट को घरेलू दर्शकों की जबरदस्त लोकप्रियता का अतिरिक्त लाभ मिलना तय माना जा सकता है।
भारत के लिए अब अगला कदम क्या?
ECB के समर्थन के संकेत से भारत का अभियान निश्चित रूप से चर्चा में आया है, लेकिन अंतिम लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लंबी प्रक्रिया और व्यापक तैयारी की जरूरत होगी। भारत को खेल सुविधाओं, शहरों की क्षमता, परिवहन, सुरक्षा, पर्यावरण और खिलाड़ियों के लिए विश्वस्तरीय व्यवस्था जैसे कई मोर्चों पर अपनी तैयारी मजबूत करनी होगी। कुल मिलाकर, रिचर्ड गाउल्ड का समर्थन भारत की ओलंपिक महत्वाकांक्षा के लिए एक सकारात्मक अंतरराष्ट्रीय संकेत है। क्रिकेट के ओलंपिक में लौटने और भारत की वैश्विक खेल भूमिका बढ़ने के बीच यह घटनाक्रम आने वाले वर्षों में काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।






