लिफ्ट का दरवाजा बंद और नेटवर्क ‘गुल’! क्या आप जानते हैं इसके पीछे का रहस्यमयी विज्ञान?
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संवाद 24 डेस्क। आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारे शरीर का एक अभिन्न अंग बन चुका है। हम हर समय दुनिया से जुड़े रहना चाहते हैं, चाहे हम मेट्रो में हों, ऑफिस में हों या घर पर। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जैसे ही आप एक लिफ्ट (Elevator) के अंदर कदम रखते हैं, आपके फोन के सिग्नल बार अचानक गायब हो जाते हैं? कॉल कट जाती है, इंटरनेट चलना बंद हो जाता है और आप दुनिया से पूरी तरह कट जाते हैं।
फैराडे केज (Faraday Cage): मुख्य अपराधी
लिफ्ट में सिग्नल न आने का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक कारण है ‘फैराडे केज’ (Faraday Cage)। 1836 में माइकल फैराडे नामक वैज्ञानिक ने एक ऐसे पिंजरे की खोज की थी जो विद्युत चुंबकीय तरंगों (Electromagnetic Waves) को अंदर आने से रोकता है।
ज्यादातर आधुनिक लिफ्ट लोहे, स्टील या एल्युमीनियम जैसी धातुओं से बनी होती हैं। विज्ञान का नियम कहता है कि जब कोई बंद डिब्बा पूरी तरह से सुचालक धातु (Conductive Metal) से बना होता है, तो वह बाहरी विद्युत चुंबकीय तरंगों को अंदर प्रवेश नहीं करने देता। चूंकि मोबाइल सिग्नल रेडियो तरंगों (Radio Waves) के रूप में यात्रा करते हैं, इसलिए लिफ्ट की धात्विक दीवारें इन तरंगों के लिए एक अभेद्य ढाल की तरह काम करती हैं।
तरंगों का परावर्तन और अवशोषण (Reflection and Absorption)
जब मोबाइल टावर से आने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स लिफ्ट की बाहरी सतह से टकराती हैं, तो धातु उन्हें अवशोषित (Absorb) कर लेती है या वापस परावर्तित (Reflect) कर देती है। लिफ्ट की दीवारों की मोटाई और उसका सघन ढांचा तरंगों को इतना कमजोर कर देता है कि वे लिफ्ट के अंदर लगे आपके फोन के एंटीना तक नहीं पहुंच पातीं। यही कारण है कि जैसे ही लिफ्ट का दरवाजा बंद होता है, नेटवर्क अचानक ‘नो सर्विस’ दिखाने लगता है।
कंक्रीट और स्टील का दोहरा जाल
लिफ्ट केवल धातु का डिब्बा ही नहीं होती, बल्कि वह एक ‘लिफ्ट शाफ्ट’ के अंदर चलती है। यह शाफ्ट आमतौर पर मोटी कंक्रीट की दीवारों और भारी स्टील के बीम से बना होता है। कंक्रीट और स्टील का यह संयोजन मोबाइल सिग्नल के लिए ‘दुश्मन’ की तरह काम करता है। ऊंची इमारतों में, जहां लिफ्ट बिल्डिंग के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित होती है, वहां सिग्नल को कई परतों को पार करना पड़ता है, जिससे उसकी ताकत खत्म हो जाती है।
आधुनिक लिफ्ट और स्मार्ट समाधान
क्या आपने देखा है कि कुछ नई और आधुनिक लिफ्ट में सिग्नल नहीं जाते? इसका कारण ‘टेक्नोलॉजी अपग्रेड’ है। 2026 तक आते-आते बिल्डर्स और टेक कंपनियां इस समस्या का समाधान निकाल चुकी हैं:
. In-Lift Repeaters: कई प्रीमियम इमारतों में लिफ्ट के अंदर छोटे सेलुलर रिपीटर या बूस्टर लगाए जाते हैं जो बाहर से सिग्नल खींचकर लिफ्ट के अंदर फैलाते हैं।
. Wi-Fi Inside Lifts: अब कई लिफ्ट शाफ्ट में वाई-फाई एक्सेस पॉइंट लगाए जा रहे हैं, ताकि यदि मोबाइल नेटवर्क चला भी जाए, तो इंटरनेट के जरिए कॉलिंग जारी रहे।
. Distributed Antenna System (DAS): बड़ी इमारतों में एक जाल बिछाया जाता है जो हर मंजिल और हर लिफ्ट के कोने तक सिग्नल पहुंचाने का काम करता है।
क्या कांच की लिफ्ट में भी यही समस्या होती है?
अक्सर लोग पूछते हैं कि क्या कांच की बनी लिफ्ट (Panoramic Lifts) में भी सिग्नल गायब होते हैं? इसका उत्तर है—नहीं, या बहुत कम। चूंकि कांच एक कुचालक (Insulator) है और यह फैराडे केज की तरह काम नहीं करता, इसलिए रेडियो तरंगें कांच के पार आसानी से जा सकती हैं। हालांकि, यदि उस कांच की लिफ्ट का फ्रेम बहुत भारी धातु का है, तो थोड़ा व्यवधान हो सकता है, लेकिन स्टील की लिफ्ट के मुकाबले वहां नेटवर्क बहुत बेहतर रहता है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा पर प्रभाव
लिफ्ट में सिग्नल न आना केवल असुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा से भी जुड़ा है। यदि लिफ्ट बीच में फंस जाए और फोन काम न करे, तो स्थिति पैनिक वाली हो सकती है। यही कारण है कि अब ‘स्मार्ट लिफ्ट’ में इमरजेंसी एसओएस बटन को सीधे लैंडलाइन या सैटेलाइट लिंक से जोड़ा जा रहा है, जो नेटवर्क न होने पर भी काम करता है।
विज्ञान का नियम अटल है
लिफ्ट में मोबाइल सिग्नल का गिरना इस बात का प्रमाण है कि हम भौतिकी के नियमों से बंधे हुए हैं। ‘फैराडे केज’ का प्रभाव आज भी उतना ही सटीक है जितना 19वीं सदी में था। हालांकि, टेक्नोलॉजी अब इस चुनौती को पार करने के लिए तैयार है। भविष्य में हम ऐसी लिफ्ट की उम्मीद कर सकते हैं जो ‘सिग्नल-फ्रेंडली’ सामग्रियों से बनी हों।






