आधी रात की कैब हो या अनजान शहर: मुश्किल वक्त में आपकी ढाल बनेगा GPS, बस सीख लें ये ट्रिक्स।
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संवाद 24 डेस्क। आज से दो दशक पहले, मोबाइल फोन का प्राथमिक उद्देश्य केवल ‘कॉल’ करना और ‘संदेश’ भेजना था। लेकिन वर्तमान डिजिटल युग में, स्मार्टफोन हमारे शरीर के एक विस्तारित अंग की तरह हो गया है। आज यह केवल एक गैजेट नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत सहायक, बैंक, मनोरंजन केंद्र और सबसे महत्वपूर्ण—एक ‘लाइफगार्ड’ बन चुका है। इस बदलाव के पीछे जिस तकनीक ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है, वह है Global Positioning System (GPS)।
GPS ने ‘लोकेशन ट्रैकिंग’ को एक आम सुविधा बना दिया है। चाहे वह किसी अनजान शहर में रास्ता खोजना हो, देर रात कैब में घर लौटना हो या किसी आपदा के समय मदद बुलाना हो, GPS हमारी सुरक्षा की पहली पंक्ति बन गया है। लेकिन जैसे-जैसे यह तकनीक हमारे जीवन में गहराई से पैठ बना रही है, इसके नैतिक उपयोग और निजता (Privacy) को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
GPS तकनीक: कार्यप्रणाली और विकास
GPS वास्तव में उपग्रहों (Satellites) का एक नेटवर्क है जो पृथ्वी की कक्षा में निरंतर चक्कर लगा रहे हैं। आपका स्मार्टफोन इन उपग्रहों से संकेत प्राप्त करता है और Trilateration नामक गणितीय प्रक्रिया के माध्यम से आपकी सटीक स्थिति का निर्धारण करता है।
शुरुआत में यह तकनीक केवल सैन्य उद्देश्यों के लिए विकसित की गई थी, लेकिन 1980 के दशक के बाद इसे नागरिक उपयोग के लिए खोल दिया गया। आज, हमारे फोन में मौजूद मैप्स, फिटनेस ऐप्स और यहाँ तक कि फोटो गैलरी भी इसी तकनीक का उपयोग करती हैं।
सुरक्षा के नजरिए से GPS का महत्व
स्मार्टफोन में लोकेशन ट्रैकिंग का सबसे सकारात्मक पहलू व्यक्तिगत सुरक्षा है। आज के दौर में यह निम्नलिखित तरीकों से वरदान साबित हो रहा है:
. इमरजेंसी रिस्पांस (SOS): अधिकांश आधुनिक स्मार्टफोन्स में ‘Panic Button’ या SOS फीचर होता है। खतरे की स्थिति में, उपयोगकर्ता द्वारा बटन दबाते ही उसकी सटीक लोकेशन पुलिस और परिजनों को मिल जाती है।
. महिला और बाल सुरक्षा: ‘शेयर माई लोकेशन’ (Share My Location) जैसे फीचर्स ने महिलाओं और बच्चों की यात्रा को सुरक्षित बनाया है। परिजन रीयल-टाइम में देख सकते हैं कि उनका प्रियजन कहाँ है।
. आपदा प्रबंधन: भूकंप, बाढ़ या जंगल की आग जैसी स्थितियों में बचाव दल फंसे हुए लोगों को GPS सिग्नल के माध्यम से खोजने में सक्षम होते हैं।
. डिवाइस की रिकवरी: फोन चोरी होने या खो जाने की स्थिति में ‘Find My Device’ जैसे फीचर्स न केवल फोन को खोजने में मदद करते हैं, बल्कि डेटा को रिमोटली सुरक्षित करने की सुविधा भी देते हैं।
जीवनशैली और व्यावसायिक सुगमता
सुरक्षा से इतर, GPS ने हमारी जीवनशैली (Lifestyle) को पूरी तरह बदल दिया है। ‘लोकेशन-बेस्ड सर्विसेज’ (LBS) ने वाणिज्य के नए द्वार खोले हैं:
. लॉजिस्टिक्स और फूड डिलीवरी: जोमैटो, स्विगी या अमेज़न जैसे प्लेटफॉर्म GPS के बिना काम ही नहीं कर सकते। यह डिलीवरी पार्टनर की लोकेशन ट्रैक कर ग्राहकों को सटीक समय की जानकारी प्रदान करता है।
. फिटनेस ट्रैकिंग: एथलीट्स और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग अपनी दौड़ने की दूरी, गति और मार्ग को ट्रैक करने के लिए GPS का उपयोग करते हैं।
. स्मार्ट नेविगेशन: गूगल मैप्स जैसे ऐप्स ट्रैफ़िक डेटा का विश्लेषण कर हमें सबसे छोटा और खाली रास्ता बताते हैं, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होती है।
नैतिकता की चुनौती: ट्रैकिंग बनाम जासूसी
जहाँ GPS एक सुरक्षा कवच है, वहीं इसका अनैतिक उपयोग इसे एक खतरनाक हथियार बना सकता है। ‘ट्रैकिंग’ और ‘स्टाकिंग’ (पीछा करना) के बीच एक बहुत महीन रेखा है।
. सहमति का अभाव (Consent): यदि किसी व्यक्ति की जानकारी या सहमति के बिना उसकी लोकेशन ट्रैक की जा रही है, तो यह अनैतिक और कई देशों में कानूनी अपराध है। ‘स्पाइवेयर’ ऐप्स का बढ़ता उपयोग चिंता का विषय है।
. डेटा का दुरुपयोग: कंपनियां अक्सर विज्ञापन उद्देश्यों के लिए उपयोगकर्ता की लोकेशन हिस्ट्री को ट्रैक करती हैं। आपकी जीवनशैली, आपके पसंदीदा स्थान और आपकी दिनचर्या का डेटा विज्ञापनदाताओं को बेचा जाता है, जो ‘निजता के अधिकार’ का उल्लंघन है।
. डिजिटल सर्विलांस: सरकारों द्वारा सुरक्षा के नाम पर नागरिकों की हर गतिविधि पर नजर रखना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत हो सकता है।
लोकेशन ट्रैकिंग का सही और नैतिक उपयोग कैसे करें?
तकनीक स्वयं में तटस्थ होती है; इसका उपयोग इसे अच्छा या बुरा बनाता है। एक जिम्मेदार डिजिटल नागरिक के रूप में हमें निम्नलिखित बिंदुओं का ध्यान रखना चाहिए:
. अनुमति प्रबंधन (Permissions): अपने स्मार्टफोन की सेटिंग में जाकर समय-समय पर यह जाँचें कि किन ऐप्स को लोकेशन की अनुमति दी गई है। अनावश्यक ऐप्स की परमिशन बंद रखें।
. सिलेक्टिव शेयरिंग: अपनी लोकेशन केवल उन्हीं के साथ साझा करें जिन पर आप भरोसा करते हैं। पब्लिक प्लेटफॉर्म्स पर ‘चेक-इन’ करते समय सावधानी बरतें।
. बच्चों के लिए सीमाएं: माता-पिता को बच्चों की सुरक्षा के लिए ट्रैकिंग का उपयोग करना चाहिए, लेकिन किशोर बच्चों के साथ इस विषय पर संवाद करना और उनकी निजता का सम्मान करना भी आवश्यक है।
भविष्य की राह
GPS और स्मार्टफोन का मेल आधुनिक सभ्यता की एक महान उपलब्धि है। यह हमें असुरक्षित दुनिया में सुरक्षा का बोध कराता है। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम तकनीकी प्रगति और व्यक्तिगत निजता के बीच कैसे संतुलन बिठाते हैं।
भविष्य में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और GPS का एकीकरण इसे और अधिक सटीक बनाएगा, लेकिन साथ ही डेटा सुरक्षा के कड़े कानूनों (जैसे भारत का DPDP एक्ट) की भी उतनी ही आवश्यकता होगी। सुरक्षा और सुविधा का आनंद तभी लिया जा सकता है जब वह नैतिकता की बुनियाद पर टिका हो।






