फ्री इंटरनेट की कीमत भारी पड़ सकती है, खाली हो सकता है आपका बैंक अकाउंट: साइबर अलर्ट जानिए सार्वजनिक Wi-Fi के छिपे खतरे
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संवाद 24 डेस्क। आज के डिजिटल युग में इंटरनेट कनेक्टिविटी हमारी रोजमर्रा की ज़िंदगी का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। जहाँ सार्वजनिक स्थलों पर फ़्री Wi-Fi एक उपयोगकर्ता के लिए किफ़ायती और सुविधाजनक विकल्प लगता है, वहीं साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसे “डिजिटल सुरक्षा का एक बड़ा जोखिम” मानते हैं। हाल ही में प्रकाशित समाचार के अनुसार हैकर्स मुफ्त Wi-Fi को फ़ायदे की चीज समझने वाले यूज़र्स के लिए ट्रोजन हॉर्स जितना खतरनाक बना सकते हैं, जिससे कुछ ही मिनटों में आपके बैंक खाते से पैसों का सफ़ाया हो सकता है।
सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क कई स्थानों — जैसे एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, कैफे, शॉपिंग मॉल और होटलों — पर उपलब्ध होते हैं जिससे लोग आसानी से इंटरनेट से कनेक्ट हो पाते हैं। लेकिन इसी सुलभता में छिपी है बड़ी सुरक्षा चुनौतियाँ, जो केवल डाटा चोरी तक सीमित नहीं रह जातीं; बल्कि व्यक्तिगत गोपनीयता, बैंकिंग सेक्योरिटी और डिवाइस नियंत्रण तक को प्रभावित करती हैं।
सार्वजनिक Wi-Fi नेटवर्क कैसे बना देता है उपयोगकर्ताओं को जोखिम में?
सार्वजनिक Wi-Fi नेटवर्क अक्सर एन्क्रिप्शन (Encryption) की सुविधा प्रदान नहीं करते। इसका अर्थ यह है कि जब आप फ़्री नेटवर्क से कनेक्ट होते हैं, तो आपका डाटा — जैसे पासवर्ड्स, बैंक डिटेल्स और निजी संदेश — एन्क्रिप्टेड नहीं रहता। ऐसे में साइबर अपराधी आसानी से बीच में ही आपकी जानकारी को इंटरसेप्ट कर सकते हैं।
सबसे आम साइबर हमलों में से एक है “Evil Twin” नेटवर्क अटैक — जिसमें एक फ़र्जी Wi-Fi हॉटस्पॉट असली जैसा दिखाया जाता है। यूज़र्स जैसे ही उसी नेटवर्क से जुड़ते हैं, उनके डाटा पर एक डिजिटल मध्यस्थ बैठ जाता है और जितनी भी जानकारी टाइप होती है, वह सीधे अपराधियों के पास चली जाती है।
इन जोखिमों के कारण सिर्फ़ डाटा चोरी ही नहीं, बल्कि मालवेयर डाला जाना, कैमरा-माइक्रोफोन का बिना इज़ाज़त सक्रिय होना, लोकेशन ट्रैकिंग, निजी तस्वीरों का चोरी होना और डिवाइस का रिमोट एक्सेस तक संभव हो जाता है।
सबसे बड़ा खतरा: बैंकिंग और UPI ट्रांज़ैक्शंस
सार्वजनिक Wi-Fi पर जब यूज़र बैंकिंग, UPI या ऑनलाइन पेमेंट करते हैं, तो उनके संवेदनशील डाटा का बीच में हाईजैक (Hijack) होने का खतरा सबसे अधिक बढ़ जाता है। साइबर एक्सपर्ट मानते हैं कि ऐसे नेटवर्क पर डाटा एन्क्रिप्शन कमजोर रहता है, जिससे अपराधी सत्र (session) को रीडायरेक्ट या इंटरसेप्ट कर सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप यूज़र को लगता है कि ट्रांज़ैक्शन सफल हुआ, लेकिन पैसा सीधे अपराधी के खाते में ट्रांसफर हो जाता है।
विशेष रूप से मोबाइल बैंकिंग और डेबिट/क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वाले उपयोगकर्ताओं को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। BIS (Reserve Bank of India) और साइबर सुरक्षा संस्थान बार-बार इस बात पर केंद्रीय चेतावनी जारी करते हैं कि सार्वजनिक नेटवर्क पर वित्तीय गतिविधियाँ बेहद जोखिम भरी हो सकती हैं।
साइबर अपराधियों के प्रमुख हथकंडे
- Evil Twin हॉटस्पॉट
यह एक नकली नेटवर्क होता है जो वास्तविक नेटवर्क जैसा नाम और SSID इस्तेमाल करता है। यूज़र जानबूझकर या अनजाने में इस नकली नेटवर्क से कनेक्ट होते हैं, जिससे डाटा अपराधियों तक जाता है। - मैन-इन-द-मिडल (MitM) अटैक
इसमें अपराधी इंटरनेट ट्रैफ़िक के बीच में बैठ जाता है और यूज़र की पूरी कम्युनिकेशन को मॉनिटर करता है। इसके जरिये लॉगिन क्रेडेंशियल्स, फॉर्म डेटा और व्यक्तिगत संचार तक चोरी किया जा सकता है। - मैलवेयर इंजेक्शन
कुछ अपराधी उपयोगकर्ता के डिवाइस में सीधे मैलवेयर इन्स्टॉल करने का प्रयास करते हैं, जिससे डिवाइस नियंत्रित किया जा सकता है या संवेदनशील फाइलें चुरा ली जा सकती हैं।
इन्हें जानना ज़रूरी: क्या कहना है विशेषज्ञों का
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और तकनीकी कंपनियों के अनुसार सार्वजनिक Wi-Fi पर कनेक्ट होने से पहले कुछ बुनियादी सावधानियाँ बरतनी बेहद आवश्यक हैं। उदाहरण के लिए — Google ने Android उपयोगकर्ताओं को सार्वजनिक नेटवर्क से जुड़ने से पहले Wi-Fi ऑटो कनेक्ट फीचर बंद करने, महत्त्वपूर्ण खातों में लॉगिन न करने और भरोसेमंद वीपीएन (VPN) का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
एक वीपीएन, अपने डाटा को एन्क्रिप्ट कर एक सुरक्षित टनल बनाता है, जिससे हैकर्स ट्रैफ़िक को पढ़ नहीं सकते। इसके अतिरिक्त HTTPS वेबसाइट्स का उपयोग करना, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का सेटअप रखना और फ़ोन/लैपटॉप का ऑटो-कनेक्ट फ़ीचर बंद रखना सुरक्षा को और मजबूत बनाता है।
सार्वजनिक Wi-Fi से जुड़े प्रमुख सुरक्षा सुझाव
- विश्वसनीय नेटवर्क पहचानें: किसी भी जगह उपलब्ध नेटवर्क से कनेक्ट होने से पहले स्टाफ से सही SSID या नाम की पुष्टि करें, ताकि नकली नेटवर्क से बचा जा सके।
- VPN का इस्तेमाल करें: एक प्रीमियम वीपीएन हमेशा चालू रखें, जो आपके डाटा को एन्क्रिप्ट करेगा और अवांछित निगरानी से बचाएगा।
- संवेदी कार्य टालें: बैंकिंग लॉगिन, पेमेंट या संवेदनशील ई-मेल खोलने जैसे कार्यों को सार्वजनिक नेटवर्क पर न करें।
- HTTPS का उपयोग: हमेशा उस वेबसाइट का चयन करें जिनके URL में HTTPS हो और लॉक 🔒 प्रतीक दिखे — यह दिखाता है कि कनेक्शन सुरक्षित है।
- ऑटो-कनेक्ट बंद करें: मोबाइल और लैपटॉप पर Wi-Fi ऑटो-कनेक्ट फीचर को बंद रखें ताकि जोखिम भरे नेटवर्क से स्वतः न जुड़े।
आज की सुरक्षा,भरोसा
सार्वजनिक वाई-फाई सुविधा प्रदान करता है, लेकिन यदि उपयोगकर्ता सावधान नहीं रहते हैं तो यह साइबर धोखाधड़ी का शिकार बनने का एक खुला रास्ता भी बन सकता है। बेहतर तकनीकी ज्ञान, सतर्कता और उपयुक्त सुरक्षा उपाय अपनाकर हम इस जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं। आज का यूज़र वही सुरक्षित कहला सकता है, जो फ्री इंटरनेट convenience के साथ अपने डाटा, पहचान और वित्तीय संपदा को भी सुरक्षित रखता है।






