नियमित सूर्य को दे रहे है अर्घ्य? जानें सही विधि
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भारतीय संस्कृति में सूर्य उपासना का विशेष महत्व माना गया है। प्राचीन धार्मिक ग्रंथों से लेकर आधुनिक योग आयुर्वेद तक, सभी में सूर्य को ऊर्जा, समृद्धि और मानसिक शांति का स्रोत बताया गया है। इसी कारण सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा सदियों से हमारे समाज में चली आ रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन में कई सकारात्मक परिवर्तन आ सकते हैं और यदि यह सही नियमों के साथ किया जाए तो इसका प्रभाव दोगुना तक हो सकता है?
सूर्य को अर्घ्य देने के वैज्ञानिक कारण
सूर्य की रोशनी हमारे शरीर के लिए सबसे बड़ा प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत है। प्रातःकालीन सूर्य किरणों को स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम माना गया है। जल अर्पित करने के दौरान जब किरणें पानी के माध्यम से आंखों तक पहुँचती हैं, तो यह शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार –
सुबह की सूर्य किरणें शरीर को विटामिन D देती हैं
मन और मस्तिष्क में सेरोटोनिन बढ़ता है, जिससे मूड अच्छा रहता है
तनाव कम होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है
आंखों और त्वचा के लिए लाभकारी
शरीर की ऊर्जा में वृद्धि
इसलिए सूर्य अर्घ्य को केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए एक प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति भी माना जाता है।
धन लाभ और सफलता से जुड़ा है सूर्य अर्घ्य का संबंध
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रह आत्मबल, प्रतिष्ठा, सफलता, पद-प्रतिष्ठा और धन का कारक है। नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देने वाले व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जो निर्णय क्षमता को मजबूत करती है और कार्यों में सफलता दिलाती है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि सूर्य की अनुकूलता आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकती है, और जीवन में उन्नति के रास्ते खोल सकती है। इसी कारण अनेक लोग सुबह सूर्य को जल चढ़ाकर दिन की शुरुआत करते हैं।
सूर्य को अर्घ्य देने का सही तरीका
???? 1. सुबह सूर्योदय से पहले उठें
सूर्योदय से 10–15 मिनट पहले तैयार होकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों।
???? 2. तांबे के लोटे या पात्र का उपयोग करें
तांबे का पात्र ऊर्जा संतुलन के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है।
???? 3. जल में थोड़ा सा रोली/चावल मिला सकते हैं
यह जल की सात्विकता बढ़ाता है।
???? 4. दोनों हाथों से जल को ऊपर उठाकर धीरे–धीरे अर्पित करें
इस दौरान सूर्य की किरणें पानी की धार से होकर आंखों पर पड़ें, जिससे वैज्ञानिक लाभ मिलता है।
???? 5. सूर्य मंत्र का उच्चारण करें
“ॐ सूर्याय नमः” का जाप सबसे उत्तम माना गया है।
???? 6. अंत में भूमि पर जल न गिराएं, पौधों या स्वच्छ स्थान पर ही जल प्रवाहित करें
इन नियमों का पालन करने से अर्घ्य का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
सूर्य अर्घ्य के आध्यात्मिक और मानसिक लाभ
मन में संतुलन और स्थिरता आती है
नकारात्मक विचारों का प्रभाव कम होता है
आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है
क्रोध और तनाव में कमी
जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
आध्यात्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह सूर्य की ओर देखकर जल अर्पित करना मन को शांति देता है और पूरे दिन को ऊर्जावान बना देता है।
क्या न करें, गलत तरीके से अर्घ्य देने पर कम होता है प्रभाव
देर सुबह या दोपहर में अर्घ्य न दें
गंदे या प्लास्टिक के बर्तन का उपयोग न करें
जल को सड़क या नाली में न गिराएँ
अर्घ्य देते समय मन अशांत या जल्दबाजी में न हों
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि सूर्य जल चढ़ाते समय अनुशासन, शुद्धता और एकाग्रता अत्यंत आवश्यक है।
सही विधि अपनाएँ, मिलेगा अधिकतम लाभ
यदि नियमित रूप से सही नियमों के साथ सूर्य को अर्घ्य दिया जाए, तो यह शरीर, मन और आत्मा तीनों के लिए फायदेमंद है। यह न केवल आध्यात्मिक उन्नति देता है बल्कि स्वास्थ्य, ऊर्जा, धन-लाभ और मानसिक संतुलन को भी बेहतर बनाता है। इसलिए यदि आप भी हर सुबह सूर्य को जल अर्पित करते हैं, तो केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से इसे जीवन में शामिल करें। इससे आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन निश्चित रूप से दिखाई देंगे।






