क्या 2026 में ग्रहण का प्रभाव पड़ेगा होलिका दहन पर? धर्मसिंधु के प्रमाण से स्पष्ट निर्णय
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संवाद 24 आचार्य मधुसूदन अग्निहोत्री। संवत् 2082 फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी, पूर्णिमा संधिकाल में होलिका दहन को लेकर इस वर्ष विशेष ज्योतिषीय एवं धार्मिक विचार उत्पन्न हुआ है, क्योंकि
पूर्णिमा तिथि
भद्रा का प्रभाव
तथा चन्द्रग्रहण (ग्रस्तोदित) तीनों का संयोग उपस्थित है।
ऐसी स्थिति में केवल सामान्य पंचांग देखकर निर्णय करना उचित नहीं, बल्कि धर्मशास्त्र एवं धर्मसिंधु के ग्रहण-विधान के आधार पर निर्णय आवश्यक है। नीचे शास्त्र प्रमाण सहित सरल भाषा में स्पष्ट निर्णय प्रस्तुत है –
तिथि स्थिति का वास्तविक विश्लेषण
🔹 2 मार्च 2026
फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी/पूर्णिमा प्रवेश
प्रदोषकाल उपलब्ध
भद्रा सायं 05:56 से प्रारंभ
भद्रा निशीथ (मध्यरात्रि) के बाद तक व्याप्त
🔹 3 मार्च 2026
पूर्णिमा सूर्यास्त पूर्व समाप्त
प्रतिपदा वृद्धिगामी
ग्रस्तोदित चन्द्र ग्रहण
प्रदोषकाल में पूर्णिमा उपलब्ध नहीं
📖 शास्त्रीय नियम क्या कहते हैं?
① सामान्य नियम
👉 होलिका दहन पूर्णिमा तिथि + प्रदोषकाल में होना चाहिए
② भद्रा नियम
धर्मग्रंथ कहते हैं —
भद्रायां होलिकादाहो निषिद्धः
(भद्रा में दहन वर्जित है)
किन्तु विशेष अपवाद —
निशीथोत्तरं भद्रासमाप्तौ मुखं त्यक्त्वा भद्रायामेव होलिकादाहः
(धर्मसिंधु)
अर्थात यदि भद्रा मध्यरात्रि के बाद तक रहे तो भद्रा का मुख त्याग कर प्रदोष में ही दहन किया जा सकता है
ग्रहण विचार का विशेष शास्त्रवचन
धर्मसिंधु का स्पष्ट आदेश —
इदं चंद्रग्रहणसत्वे वेधमध्ये कार्यम्… अन्यथा पूर्वदिने
अर्थात यदि अगले दिन
✔ ग्रहण हो
✔ प्रदोष में पूर्णिमा न मिले तो
पूर्व दिन ही होलिका दहन करें
इस वर्ष की स्थिति का निष्कर्ष
3 मार्च को —
❌ ग्रस्तोदित चन्द्रग्रहण
❌ प्रदोषकाल में पूर्णिमा नहीं
अतः शास्त्रानुसार उस दिन दहन वर्जित है।
इसलिए —
✅ होलिका दहन 2 मार्च 2026 (प्रदोषकाल) में ही करना शास्त्रसम्मत है
🔥 दहन का शुद्ध समय निर्देश
सूर्यास्त से लगभग 2 घंटे 24 मिनट = प्रदोषकाल
भद्रा का मुख उस समय नहीं रहेगा
अतः प्रदोष वेला में ही दहन करना उत्तम
🕉️ धार्मिक महत्व
शास्त्रसम्मत समय पर होलिका दहन करने से —
✨ रोग नाश
✨ दारिद्र्य शमन
✨ ग्रह पीड़ा शांति
✨ परिवार में सुख-समृद्धि
✨ दैवी कृपा प्राप्ति
अन्यथा दोष उत्पन्न हो सकते हैं।
अंतिम मार्गदर्शन
👉 तिथि + नक्षत्र + भद्रा + ग्रहण — चारों का संयुक्त विचार आवश्यक
👉 स्थानीय सूर्यास्तानुसार समय लें
👉 योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेकर ही संस्कार करें







