
कन्नौज। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत कन्नौज में आयोजित समारोह में 95 जोड़े विवाह बंधन में बंध गए। पीएसएम डिग्री कॉलेज मैदान में आयोजित कार्यक्रम में वर-वधुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अपने वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत की। इस आयोजन का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विवाह के खर्च में राहत देना और पात्र जोड़ों को सम्मानजनक ढंग से विवाह का अवसर उपलब्ध कराना है।
89 हिंदू और छह मुस्लिम जोड़ों का हुआ विवाह
समारोह में कुल 95 जोड़ों ने वैवाहिक रस्में पूरी कीं। उपलब्ध समाचार रिपोर्ट के अनुसार, इनमें 89 हिंदू और छह मुस्लिम जोड़े शामिल थे। विकास खंड कन्नौज के 72 तथा नगर पालिका परिषद कन्नौज के 23 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया। आयोजन में विभिन्न परिवारों के लोगों ने भाग लेकर नवदंपतियों को शुभकामनाएं दीं।
समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने दी शुभकामनाएं
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने की। उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को सुखद वैवाहिक जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। समारोह में नवदंपतियों को गृहस्थी शुरू करने के लिए आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई, ताकि उन्हें नई जिंदगी की शुरुआत में मदद मिल सके।
चांदी की पायल और बिछिया की जगह खाते में आएंगे 4 हजार रुपये
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में शासन स्तर पर बदलाव किया गया है। चांदी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए पायल और बिछिया के स्थान पर वधू के बैंक खाते में 4,000 रुपये अतिरिक्त देने की व्यवस्था की गई है। इस बदलाव के बाद वधू के खाते में दी जाने वाली राशि 60,000 रुपये से बढ़कर 64,000 रुपये हो गई है। इस संबंध में जून 2026 में प्रकाशित कन्नौज की एक रिपोर्ट में शासन की मंजूरी की जानकारी दी गई थी।
गृहस्थी की सामग्री देकर नवदंपतियों को किया गया सहयोग
सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत पात्र जोड़ों को आर्थिक सहायता के साथ गृहस्थी बसाने के लिए उपयोगी सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। समारोह में वस्त्र, बर्तन और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुओं सहित आवश्यक सामग्री दी गई। इस पहल का उद्देश्य नवविवाहित परिवारों को शुरुआती जरूरतों में सहयोग देना है।
जरूरतमंद परिवारों को राहत देना योजना का उद्देश्य
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहायता का माध्यम है। सामूहिक आयोजन के जरिए विवाह संबंधी खर्च का बोझ कम करने के साथ पात्र लाभार्थियों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। योजना में किए गए बदलावों से लाभार्थियों को सीधे आर्थिक सहायता देने पर जोर दिया गया है।






