कन्नौज की गौशालाओं में सीसीटीवी से होगी निगरानी

कन्नौज में गोवंश संरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का निर्णय लिया है। जिले के गोवंश आश्रय स्थलों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और उनकी निगरानी जिला स्तर पर संचालित कमांड सेंटर से की जाएगी। इसके साथ ही अधिकारियों को गोशालाओं का नियमित स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति जांचने के निर्देश दिए गए हैं। कन्नौज जिला प्रशासन की वेबसाइट पर आशुतोष मोहन अग्निहोत्री को वर्तमान जिलाधिकारी के रूप में दर्ज किया गया है।

कैमरे बताएंगे गोशालाओं की जमीनी हकीकत

सीसीटीवी व्यवस्था लागू होने के बाद प्रशासन को गोशालाओं की गतिविधियों पर जिला स्तर से निगरानी रखने में मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य केवल कैमरे लगाना नहीं, बल्कि गोवंश के लिए उपलब्ध चारा, पानी, आश्रय और रखरखाव जैसी व्यवस्थाओं की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना है। प्रदेश के अन्य जिलों में भी गोआश्रय स्थलों को सीसीटीवी और केंद्रीय निगरानी व्यवस्था से जोड़ने की पहल की गई है।

बीडीओ करेंगे तीन-तीन गोशालाओं का निरीक्षण

जिलाधिकारी ने सभी खंड विकास अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों की कम से कम तीन-तीन गोशालाओं का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का सत्यापन करना होगा, ताकि कागजी रिपोर्ट और जमीनी स्थिति के बीच किसी तरह का अंतर न रहे।

बारिश से बचाव से लेकर हरे चारे तक होगी जांच

निरीक्षण के दौरान गोवंश को बारिश से बचाने के इंतजाम, पर्याप्त हरे चारे की उपलब्धता, भूसे का भंडारण, पेयजल और पशुओं के रखरखाव की स्थिति को प्रमुखता से देखा जाएगा। अधिकारियों को जहां भी कमी मिले, वहां तत्काल सुधार कराने के निर्देश दिए गए हैं।

कन्नौज में डिजिटल निगरानी अभी भी बड़ी चुनौती

कन्नौज में गोशालाओं की डिजिटल निगरानी को लेकर पहले भी स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं रही है। जुलाई 2026 की एक स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार जिले की 125 गोशालाओं में से 60 के सीसीटीवी ही कंट्रोल रूम से जुड़े थे, जबकि 65 गोशालाएं निगरानी तंत्र से बाहर थीं। कुछ स्थानों पर इंटरनेट रिचार्ज समाप्त होने और कैमरों में खराबी जैसी समस्याएं भी सामने आई थीं।

लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश

प्रशासन का जोर अब तकनीकी निगरानी के साथ-साथ नियमित स्थलीय निरीक्षण पर भी है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि गोवंश संरक्षण में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। खासतौर पर बरसात के मौसम में पशुओं के लिए आश्रय, चारा और पानी की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए।

तकनीक और निरीक्षण से बढ़ेगी जवाबदेही

यदि सभी गोशालाओं के कैमरे नियमित रूप से कमांड सेंटर से जुड़े रहते हैं और अधिकारी समय-समय पर मौके पर जाकर व्यवस्थाओं का सत्यापन करते हैं, तो निगरानी व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकती है। इससे प्रशासन को समस्याओं की पहचान और उनके समयबद्ध समाधान में मदद मिलेगी तथा गोवंश आश्रय स्थलों के संचालन में जवाबदेही बढ़ाने का रास्ता मजबूत होगा।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *