मृत्यु प्रमाण-पत्र के नाम पर ₹5 हजार मांगने का आरोप, हसेरन में सचिव पर गंभीर शिकायत

कन्नौज जिले के हसेरन विकासखंड की ग्राम पंचायत नादेमऊ में मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाने के नाम पर कथित रूप से पांच हजार रुपये मांगने का मामला सामने आया है। नादेमऊ निवासी पुष्पेंद्र सिंह ने ग्राम पंचायत अधिकारी (सचिव) पर रुपये मांगने और भुगतान नहीं करने पर आवेदन वापस करने का आरोप लगाया है। हालांकि ग्राम पंचायत अधिकारी ने आरोपों को निराधार बताया है। ऐसे में शिकायत की सत्यता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

बुआ के मृत्यु प्रमाण-पत्र के लिए किया था आवेदन

प्राप्त जानकारी के अनुसार नादेमऊ निवासी पुष्पेंद्र सिंह पुत्र इंद्रेश कुमार की बुआ ज्ञाना देवी अविवाहित थीं। उनके निधन के बाद पुष्पेंद्र ने मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। पुष्पेंद्र का आरोप है कि आवेदन की प्रक्रिया के दौरान संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी ने उनसे प्रमाण-पत्र बनवाने के एवज में पांच हजार रुपये की मांग की।

रुपये नहीं दिए तो आवेदन वापस करने का आरोप

शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने पांच हजार रुपये देने में असमर्थता जताई। इसके बाद कथित तौर पर फोन पर उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और बाद में आवेदन वापस कर दिया गया। आवेदक ने उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

सचिव ने आरोपों को बताया निराधार

मामले में ग्राम पंचायत अधिकारी का पक्ष भी सामने आया है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए रिश्वत मांगने समेत अन्य आरोपों को निराधार बताया है। इसलिए रिश्वत मांगने की बात को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि स्थापित तथ्य के रूप में।

बीडीओ बोले—आरोप सही मिले तो होगी नियमानुसार कार्रवाई

हसेरन के खंड विकास अधिकारी राम सिंह यादव ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने कहा कि आरोप सही पाए जाने की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब प्रशासनिक जांच पर नजर रहेगी कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं।

सरकारी वेबसाइट पर मृत्यु प्रमाण-पत्र की फीस ₹20

इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि कन्नौज जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर पंचायत से संबंधित सेवाओं की सूची में मृत्यु प्रमाण-पत्र की निर्धारित फीस ₹20 दर्ज है। इसी सूची में जन्म प्रमाण-पत्र के लिए भी ₹20 शुल्क बताया गया है। ऐसे में शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए ₹5,000 मांगने के आरोप और निर्धारित सरकारी शुल्क के बीच बड़ा अंतर है।जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार ई-डिस्ट्रिक्ट व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों को सरकारी सेवाएं ऑनलाइन/जनसेवा केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराते हुए प्रक्रिया में पारदर्शिता और समय की बचत सुनिश्चित करना है।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *