
करीब दो दशक पुराने चर्चित नीरज मिश्रा हत्याकांड को लेकर कन्नौज की राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। हिंदुस्तान आजाद मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश पाल देशबंधु ने बुधवार को कन्नौज में आयोजित प्रेस वार्ता में घोषणा की कि आगामी विधानसभा सत्र के दौरान वे विधानसभा के बाहर आमरण अनशन करेंगे। उनका कहना है कि अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक मामले की निष्पक्ष जांच शुरू नहीं होती। यह उनके व्यक्तिगत आरोप और मांग हैं; इनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रेस वार्ता में लगाए गंभीर आरोप
मोतीमहल होटल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुकेश पाल देशबंधु ने नीरज मिश्रा हत्याकांड को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और मुख्य आरोपी अब तक प्रभाव के कारण कानून की पकड़ से बाहर है। इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई नया आधिकारिक साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया और संबंधित पक्ष की ओर से इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है।
डिंपल यादव के निर्विरोध निर्वाचन पर भी उठाए सवाल
मुकेश पाल देशबंधु ने कन्नौज से डिंपल यादव के निर्विरोध सांसद चुने जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि उस समय कुछ संभावित प्रत्याशियों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया था। उन्होंने कहा कि इस संबंध में साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं और भविष्य में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
धमकियां मिलने का भी लगाया आरोप
प्रेस वार्ता में उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2025 में अखिलेश यादव के विरुद्ध वर्ष 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ने संबंधी सोशल मीडिया पोस्ट करने के बाद उन्हें और उनके परिवार को कई बार कथित रूप से धमकियां मिलीं। उन्होंने कहा कि वे इन धमकियों से पीछे हटने वाले नहीं हैं और अपने आंदोलन को जारी रखेंगे। इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पहले भी सुर्खियों में रहा है मामला
नीरज मिश्रा हत्याकांड हाल के दिनों में सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो के कारण फिर से राजनीतिक बहस का विषय बना है। इस मामले को लेकर विभिन्न पक्षों ने अलग-अलग दावे किए हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कुछ वायरल दावों को भ्रामक बताते हुए पुलिस से शिकायत भी की है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक और जांच एजेंसियों की प्रक्रिया के बाद ही माना जाएगा।






