सर्किल दर वृद्धि पर तिर्वा में वकीलों का विरोध तेज
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कन्नौज जिले की तिर्वा तहसील में नई सर्किल दरों के प्रस्ताव को लेकर वकीलों में भारी रोष देखने को मिला। एक वर्ष के भीतर दूसरी बार जमीन की सरकारी कीमतों में वृद्धि की सूचना मिलते ही अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर एक दिवसीय हड़ताल और विरोध प्रदर्शन किया। वकीलों का कहना है कि यह फैसला न केवल आम जनता बल्कि किसानों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा।
एक साल में दूसरी बढ़ोतरी क्यों?” उठे सवाल
अधिवक्ताओं के अनुसार, पिछले वर्ष सितंबर में ही सर्किल दरों में बढ़ोतरी की गई थी। ऐसे में एक साल पूरा होने से पहले ही नई दरें लागू करने की तैयारी प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। पूर्व अध्यक्ष मनोज राजपूत ने इस निर्णय को जल्दबाजी भरा बताते हुए कहा कि यह कदम जनता के हितों के विपरीत है।
किसानों की परेशानी का भी मुद्दा बना
वकीलों ने अपने विरोध में किसानों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। हाल ही में हुई बेमौसम बारिश से फसलों को नुकसान हुआ है, जिससे किसान पहले ही आर्थिक संकट में हैं। ऐसे समय में सर्किल दरों में वृद्धि से जमीन खरीद-फरोख्त महंगी होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
ज्ञापन सौंपकर रखी प्रमुख मांगें
अध्यक्ष अशोक राजपूत के नेतृत्व में वकीलों ने एसडीएम और उप निबंधक को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की कि पांच माह पूर्व जारी सूची में मौजूद विसंगतियों को पहले सुधारा जाए और नई सर्किल दरों पर तत्काल रोक लगाई जाए। वकीलों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई, तो आंदोलन को और तेज व उग्र रूप दिया जाएगा। इस विरोध में कई वरिष्ठ वकील शामिल रहे, जिससे यह स्पष्ट है कि मामला अब व्यापक स्तर पर तूल पकड़ सकता है।
जमीन बाजार पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार सर्किल दरों में वृद्धि से जमीन के सौदों में गिरावट आ सकती है। इससे रियल एस्टेट गतिविधियों पर असर पड़ेगा और सरकारी राजस्व पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।






