क्या भारत में दूसरे देशों के लिए प्रदर्शन करना उचित है? सौरिख की घटना से चर्चा तेज
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ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनाई की मौत की खबर सामने आने के बाद कन्नौज जनपद के सौरिख क्षेत्र में शिया समुदाय के लोगों में गहरा शोक और आक्रोश देखने को मिला। मंगलवार देर शाम नगर और आसपास के गांवों में मजलिसें आयोजित की गईं, जहां लोगों ने शोक व्यक्त करते हुए अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रिया
बताया जा रहा है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों में आयतुल्लाह अली खामेनाई की मौत हो गई। ईरानी सरकारी मीडिया ने भी बाद में उनके निधन की पुष्टि की और देश में शोक की घोषणा की। खामेनाई लगभग 36 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे और मध्य-पूर्व की राजनीति में उनका बड़ा प्रभाव माना जाता था। इस खबर के प्रसार के बाद दुनिया के कई हिस्सों में शिया समुदाय के बीच शोक सभाएं और प्रदर्शन हुए, जिनकी झलक कन्नौज के सौरिख क्षेत्र में भी देखने को मिली।
सौरिख, कबीरपुर और राजापुर में मजलिसों का आयोजन
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य अली अब्बास नकवी ने बताया कि खामेनाई के निधन की खबर से समुदाय में दुख और आक्रोश है। उन्होंने दावा किया कि इजराइल और अमेरिका के हमलों के कारण उनकी मृत्यु हुई है। इसी क्रम में सौरिख, कबीरपुर और राजापुर समेत कई स्थानों पर मजलिसों का आयोजन कर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी गई।
सरोजनीनगर मस्जिद में कैंडल जलाकर किया मातम
मंगलवार देर शाम सौरिख के सरोजनीनगर मस्जिद परिसर में शोक सभा आयोजित की गई। यहां लगभग पचास से अधिक बच्चे, बुजुर्ग और युवाओं ने मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि दी और तीन दिनों तक शोक मनाने का निर्णय लिया। कार्यक्रम के दौरान लोगों ने खामेनाई के विचारों और मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों पर उनकी भूमिका को याद किया।
कई धार्मिक और सामाजिक लोग रहे मौजूद
शोक सभा में मौलाना मोहम्मद मेंहदी, मौलाना रज़ा अब्बास फहमी, मौलाना शहंशाह हुसैन, हुसैन हैदर, नुसरत हुसैन, शब्बर अली, नाजिम हुसैन, हैदर अब्बास, कैसर अब्बास और गुलाम अब्बास सहित कई स्थानीय लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए दुआ की गई।
मध्य-पूर्व में बढ़ा तनाव, दुनिया की नजरें ईरान पर
खामेनाई की मौत के बाद मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ गया है। कई देशों में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जबकि ईरान में नए सर्वोच्च नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर वैश्विक राजनीति और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर भी पड़ सकता है।






