फतेहगढ़ में ‘सप्तशक्ति संगम’ कार्यक्रम संपन्न, मातृशक्ति को राष्ट्रनिर्माण के लिए जागरूक करने पर दिया गया जोर
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संवाद 24 फर्रुखाबाद। विद्या भारती द्वारा संचालित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, जय नारायण वर्मा रोड, फतेहगढ़ में शुक्रवार अपराह्न 1 बजे से ‘सप्तशक्ति संगम’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें बड़ी संख्या में मातृशक्ति, छात्राएं और स्थानीय बहनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
नारी के सात दिव्य गुणों पर हुआ बड़ा संवाद, मातृशक्ति के महासंगम में क्या हुआ खास?
कार्यक्रम का उद्देश्य, नारी शक्ति को नई दिशा देना –
कार्यक्रम का संचालन बहन गीतांजलि और ग्रेसी ने संयुक्त रूप से किया। उपस्थित अतिथियों का परिचय गीतांजलि ने दिया। कार्यक्रम की संयोजिका मानसी तिवारी ने प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए बताया कि सप्तशक्ति संगम का उद्देश्य मातृशक्ति की अदृश्य और अप्रतिम क्षमता को पहचानते हुए उन्हें राष्ट्र और समाज के विकास की मुख्य धुरी के रूप में स्थापित करना है। यह आयोजन महिलाओं में,
आत्मविश्वास,
नेतृत्व क्षमता,
सामाजिक उत्तरदायित्व,
सांस्कृतिक मूल्यों की समझ,
जैसी प्रमुख शक्तियों को मजबूती प्रदान करने के लिए किया जाता है। विभिन्न सत्रों और संवादों के माध्यम से भारतीय संस्कृति में महिला की भूमिका, उसके योगदान और समाज निर्माण की प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्य अतिथि डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव ने कहा “नारी ही परिवार, समाज और राष्ट्र की आधारशिला।”
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विद्या भारती की बालिका शिक्षा प्रांतीय प्रशिक्षिका डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव (कानपुर) उपस्थित रहीं। अपने उत्साहवर्धक संबोधन में उन्होंने कहा कि महिला परिवार को जोड़ने वाली शक्ति है, और परिवार ही समाज एवं राष्ट्र का आधार होता है। अतः एक सशक्त महिला ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकती है।
उन्होंने बताया कि नारी –
परिवार का विकास करती है,
परिवार से समाज को गढ़ती है,
और समाज से राष्ट्र को दिशा देती है।**
उन्होंने स्वदेशी, स्वाभिमान, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर विशेष बल दिया और कहा कि “हम बदलेंगे, युग बदलेगा और युग बदलेगा तो देश बदलेगा।”

सात शक्तियों का भावार्थ नारी के उत्थान का मार्ग
डॉ. श्रीवास्तव ने महिलाओं को संबोधित करते हुए ज्ञान शक्ति, आत्म शक्ति, संस्कार शक्ति, संगठन शक्ति, रचना शक्ति, नेतृत्व शक्ति और राष्ट्र शक्ति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के दसवें अध्याय के श्लोक 34 “कीर्तिः श्रीवाच नारीणां स्मृतिर्मेधा धृतिः क्षमा॥” का भी वर्णन किया। यह श्लोक नारी के दिव्य गुणों का प्रत्यक्ष परिचय देता है –
कीर्ति – यश, लोकप्रियता
श्री – समृद्धि व सौंदर्य
वाक् – मधुर वाणी
स्मृति – याददाश्त
मेधा – बुद्धि एवं समझ
धृति – धैर्य, दृढ़ता
क्षमा – क्षमा करने की शक्ति
उन्होंने कहा कि ये सभी गुण एक आदर्श नारी की पहचान हैं, और समाज में महिलाओं की भूमिका इन गुणों से ही प्रखर होती है।

इंटरैक्टिव सत्र एवं प्रश्नोत्तरी
कार्यक्रम की अध्यक्षा पूनम शुक्ला ने बहनों के साथ प्रश्नोत्तरी सत्र आयोजित किया, जिसमें महिलाओं से विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक मुद्दों पर प्रश्न पूछे गए। उन्होंने प्रतिभागियों को सुझाव देते हुए बताया कि नारी तभी आत्मनिर्भर बन सकती है जब वह ज्ञान, संस्कार और आधुनिक कौशल का समन्वय करे।
विशिष्ट अतिथि श्वेता दुबे का संबोधन
विशिष्ट अतिथि श्वेता दुबे ने महिलाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। नारी के अस्तित्व, उसकी संवेदनशीलता और सृजनशीलता पर आधारित व्याख्यान को प्रतिभागियों ने बेहद सराहा।
आभार प्रदर्शन
कार्यक्रम की सहसंयोजिका रानी दुबे ने सभी अतिथियों, विद्यालय परिवार और कार्यक्रम में आई हुई 250 से अधिक महिलाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन महिलाओं को मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उपस्थित रही बहनें और विद्यालय परिवार
इस अवसर पर विद्यालय की आचार्य बहनें पायल, ईश्वरी, श्रेया, एकता, प्रीति, स्वाति, गरिमा, कुसुम, प्रियंका सहित बड़ी संख्या में शिक्षिकाएं और स्वयंसेवी बहनें मौजूद रहीं। पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह, अनुशासन और गरिमापूर्ण वातावरण बना रहा।
अंततः फतेहगढ़ में आयोजित सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम मात्र एक आयोजन नहीं, बल्कि महिलाओं के सामूहिक उत्थान, आत्मबल वृद्धि और राष्ट्रनिर्माण के प्रति उनके योगदान को सम्मान देने का प्रयास था। विद्या भारती द्वारा संचालित इस पहल ने यह संदेश दिया कि नारी शक्ति ही समाज और राष्ट्र की असली ऊर्जा है, और उसके जागरण से ही सुदृढ़ भारत का निर्माण संभव है।






